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मंगलवार, 6 सितंबर 2016

हकलाहट बनाम नई भाषा सीखना

                         हकलाहट बनाम नई भाषा सीखना

1. जिस प्रकार हम अंग्रेजी या कोई नई भाषा बोलना सीखते समय ढेरों गलतियां करते हैं, उसी तरह हकलाहट पर कार्य करते समय भी गलतियां होना, बार-बार हकलाना स्वाभाविक है। आप अपने घर में कमरे के अन्दर बैठकर धाराप्रवाह बोलना नहीं सीख सकते हैं। आपको बाहर निकलना होगा बार-बार हकलाने के लिए, बार-बार गलतियां करने के लिए।
2.
नई भाषा हम तभी सीख सकते हैं जब अपने दैनिक जीवन में, कार्यालय में, कॉलेज में और परिवार में बार-बार उसका इस्तेमाल करें। ठीक इसी तरह जब आप कलाहट पर काम करना शुरू करेंगे तो सभी जगह हकलाहट के बारे में खुलकर बातचीत करना, स्पीच तकनीक का अभ्यास करना, स्वैच्छिक हकलाहट यानी जान-बूझकर हकलाना आदि का प्रयोग करना जरूरी है। 
3. अंग्रेजी या कोई नई भाषा सीखने के लिए बार-बार गलत बोलना, गलत उच्चारण करना एक सामान्य और स्वाभाविक प्रक्रिया है। ऐसे ही हकलाहट पर काम करते समय कई बार हकलाना, विपरीत हालातों का सामना करना सीखना एक सामान्य बातचीत का ही हिस्सा है।
4. नई भाषा सीखते समय जब आप किसी शब्द को गलत बोलते है, तो उसका सही अर्थ जानना और सही उच्चारण करने की कोषिष करते हैं। इसी तरह जब आप किसी शब्द पर हकलाते हैं, तो बार-बार उस शब्द का सही उच्चारण करने की कोषिष करते हैं, कोई स्पीच तकनीक का प्रयोग कर उच्चारण करते हैं।
5. नई भाषा सीख सीखने के दौरान जब हम एक-दो शब्द या वाक्य सही बोलते हैं, तो अन्दर से बड़ा सुकून मिलता है, आनन्द आता है। उसी तरह हकलाहट पर वर्क करते समय जब आप किसी शब्द या वाक्य को सही तरीके से बोल पाएं तो उसकी खुषी मनानी चाहिए, सुख का अहसास होना चाहिए।
6. अंग्रेजी या नई भाषा के प्रति झिझक खत्म करने के लिए हमेषा अनजान लोगों से बातचीत करने की सलाह दी जाती है। ठीक यही बात हकलाहट पर भी लागू होती है। हकलाहट के डर से आजाद होने के लिए अनजान लोगों से लगातार बातचीत करने
6. अंग्रेजी या नई से बातचीत करने की सलाह दी जाती है। ठीक यही बात हकलाहट पर भी लागू होती है। हकलाहट के डर से आजाद होने के लिए अनजान लोगों से लगातार बातचीत करने की कोषिष करते रहना आवष्यक है। तभी आप हकलाहट के डर से आजाद हो पाएंगे।
7. नई भाषा में प्रभावी संचार के लिए अपने चेहरे के हाव-भाव, आई कान्टेक्ट, हाथेलियां और पैर के सही भाषा के प्रति झिझक खत्म करने के लिए हमेषा अनजान लोगों संचालन पर ध्यान देने की बात कही जाती है, यही सब बातें हकलाहट पर भी लागू होती हैं। एक बेहतर संचार के लिए इन सभी बातों पर गहराई से ध्यान देना सभी के लिए जरूरी है। 
8. नई भाषा आप अपने जीवन में विकास के लिए, सफलता अर्जित करने के लिए, ज्ञान प्राप्त करने के लिए, अधिक से अधिक लोगों बातचीत करने के लिए सीखते हैं। ठीक इसी तरह हकलाहट पर वर्क आप इसीलिए करते हैं, ताकि एक कुषल संचारकर्ता बन सकें। 
पते की बात : आप यह सोचना छोड़ की हकलाने पर लोग क्या कहेंगे? महत्वपूर्ण बात तो यह है की खुद के प्रति समर्पित होकर हकलाहट के लिए वर्क करना कब शुरू करेंगे? कब तक इंतजार करते रहेंगे? कब तक तारीख पर तारीख आती रहेगी और आप हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे? सच तो यह है कि हकलाहट पर कार्य करने के लिए किसी मुहूर्त की जरूरत नहीं है, आप तुरंत षुरू कर दें, मुष्किलों का सामना करें और आगे बढ़ें।------ more

बुधवार, 10 अगस्त 2016

हकलाहट की दवाई

आप सब लोगो को बड़ी बेताबी से हकलाहट की दवाई खोजते नजर आते मै देखता हु | पहले मै भी ,यही सोचता था की कोई न कोई दवाई तो अवश्य होगी जो हमारी हकलाहट को ठीक कर देगी,कई डाक्टरों को हकलाहट के इलाज के लिए जाता था जैसे ही मन में आता की अब बोलना है की मै हकलाता हु, वैसे ही डर बोलता की- तुम्हारी बदनामी होगी मत कहो' डाक्टर हँसेगे, और मै बोलता की डॉक्टर साहब मुझे बुखार आती है , दवाई लेता और चला आता, एक बार हद तब हो गई जब मुझे बिना बुखार के, सूजी लगवानी पड़ी
दोषतो आप को हकलाहट की दवाई अवश्य मै दुगा जो मैंने खाई थी वह दवाई है विचारो को बदलने की ,थोडा थोडा डेली अपने आप को बदलने की ,हकलाहट को स्वाविकार करने की , ठीक बोलने की कोशिश करने की ,यदि आप केवल थोड़ी सा प्रयास करेगे , आपने आप को बदलने की, तो आप पायेगे की, आप तो थोड़ी प्रयास कर रहे है लेकिन भागवान आप को अधिक फल देगा | यहाँ मै कुछ बाते लिखता हु जो आप को सफलता अवश्य दिलाएगी
1- मुझे हमेशा याद रखना चाहिए की मै तनाव मुक्त्य ,निडर आत्मा विश्वाशी आराम से बोलने वाला आदमी हु |
२- आदत को सुधारना है थोडा अ आप को स्पीड धीमी करनी होगी | मै यहाँ पर एक बात कहुगा की हकलाने वाले लोग यह मानते ही नहीं की मै अधिक स्पीड से बोलता हु ,या जानते ही नहीं है की अनियंत्रित स्पीड हमारी हकलाहट का एक कारण है |
हम सबको थोडा सा स्पीड कम करना चाहिए ,बहुत से लोग कहते है की मै धीरे नहीं बोल सकता | मै आप से यह नहीं कह रहा हु की आप बिलकुल धीमा गाने जैसा बोलो ,लेकिन इतना कण्ट्रोल करो की आप के स्पीच ओरगन सही वर्क कर सके ,आप को बोलने का मौका मिले ,आप को सोचने का मौका मिले , आप की आवाज सुनने वालो को समझ में आनी चाहिए | अब सवाल यह है की मै कितना धीमा बी बोलु , आप स्याम अपनी आवाज सुनो ,और जो स्पीड आप को सुनने ,समझने में ठीक लगे वाही आप की सही स्पीड होगी ,प्रारंभ में आप थोडा और धीमा बोले तो बेहतर होगा ,लेकिन गाने जैसा नहीं बोलना चाहिए |
जब आप धीमा बोलने की कोशिश करेगे तो प्रारंभ में थोडा अटपटा लगेगा क्योकि आप अधिक स्पीड बोलने के आदि है| आप के मन में कुछ नेगतीवे विचार भी आयेगे जैसे मै कब तक धीमा बोलूगा , इतनी देर मेरी बात कौन सुनेगा , मै अभी नहीं बाद में धीरे बोलूगा , अभी यहाँ एसे ही बोलता हु बाद में सुधारुगा , सभीलोग तो स्पीड ही बोलते है वह क्यों नहीं अटकते है ,मै ही क्यों अटकता हु
हमको कुछ बदलना पड़ेगा ,अपने आप को ,विचारो हो , स्पीच ओरगन के वोर्किंग करने के तरीको को , एक फ़ॉर्मूला याद आता है
चेंज ( अपने आप को ) = सुधार ( आप की स्पीच में )
१ स्पीड कण्ट्रोल २- आप की स्पस्ट आवाज आयेगी
२ -स्पीच ओरगोन २- चेहरा में सिकुडन ख़त्म होगी
३- हकलाना को स्वबिकर करो ३- डर दिमाग से निकलेगा
४- ध्यान से दुसरो की बात सुनो ४= अंसार देने ,और प्रशन पूछने का मनोबल बढेगा
५- स्माल स्माल वाक्य उपयोग करना ५=लम्बे समय तक बात कर सकते हो 

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2016

हकलाने वाले लोगों से कैसे बातचीत करें?

मलयालम हास्य फिल्म Su.. Su... Sudhi Vathmeekam में एक रोचक दृश्य है. मुख्य अभिनेता सुधी एक दुकान में जाकर अंडा (मलयालम में कोझीमुट्टा) खरीदने की कोशिश करता है, लेकिन अंत में गोभी लेना पड़ता है. यह दृश्य हकलाने वाले व्यक्तिओं की समस्याओं को अच्छी तरह से दर्शकों को परिचित करवाता है. दृश्य में दुकानदार जल्दी में है, और कहता है कि तुम क्या चाहते हो? अभिनेता बोलने के लिए बहुत संघर्ष करता है, तभी उसके पास खड़ी महिला हंसने लगती है. वह फिर से बोलने की भरसक कोशिश करता है और अब दुकानदार अपनी बेचैनी दिखता है. सुधी इतने सारे प्रयासों के बाद भी “कोझीमुट्टा” नहीं बोल पाता. आखिर में दुकानदार सुधी की मदद करने का फैसला करता है. और कहता है- क्या तुम गोभी मांग रहे हो? सुधी सोचता है की अब बहुत हो गया और गोभी खरीद लेता है. 

 यदि आप इस बारे में सोच रहे हैं कि हकलाने वाले लोगों से बातचीत करते समय किन-किन जरूरी बातों को ध्यान में रखना चाहिए तो यह दृश्य सिखाता है कि आपको क्या-क्या नहीं करना चाहिए! अभी हाल में मैंने एक ऐसे व्यक्ति के बारे में पढ़ा जो सुन-बोल नहीं सकताऔर समाज में उसके साथ काफी सम्मानजनक व्यवहार किया जाता है। वही हकलाने वाले व्यक्ति को समाज में बहुत ही अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ता है। अक्सर लोग हकलाने वाले व्यक्ति की हकलाहट को सुनकर हंसने लगते हैंलोग यह नहीं समझ पाते कि इसका हकलाने वाले व्यक्ति के आत्मविश्वास पर कितना बुरा असर होगाहकलाने वाले व्यक्ति को अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए एक-एक शब्द से संघर्ष करना पड़ता है। कृपया उन्हें वैसा ही सम्मान दें जैसा आप दूसरों से अपने लिए चाहते हैं। 
 
हकलाने वाले व्यक्ति से बातचीत करते समय धैर्य रखें। उनकी बात ध्यान से सुनें और सामान्य आई कान्टेक्ट (आँख से संपर्क) बनाएं। अपनी भावभंगिमाए शब्दों और प्रतिक्रिया से ऐसा कतई प्रदर्शित न करें कि आप असहज महसूस कर रहे हैं। उन्हें बोलने का पूरा समय दें। साथ ही किसी तरह की सलाह न दें जैसे. धीरे बोलोगहरी सांस लो। आपके ऐसा करने से संवाद की प्रक्रिया बदतर हो सकती है। यदि बातचीत करते समय स्थिति अनुकूल होगी तो हकलाने वालाव्यक्ति सहज होकर अच्छी तरह से बोल पाएगा।
कई बार लोग सोचते हैं कि हकलाने वाले व्यक्ति को बोलने में परेशानी हो रही हैइसलिए उसके शब्द या वाक्य को पूर्ण करने में थोड़ा मदद कर दी जाएउसके शब्द या वाक्य को बोलकर! ऐसा कदापि न करें। इससे हकलाने वाले के मन में यह भावना आएगी की वह अपने विचारों को अभिव्यक्त करने में असफल रहा उसका आत्मविश्वास प्रभावित होगा। उसे अपनी बात पूरी कहने का मौका दें और यदि आप उसकी बात समझ नहीं पाएं हों तो दोबारा कहने का अनुरोध करें। यह हकलाने वाले के शब्दों और वाक्यों को दोहराने से अच्छा है। कई बार बोलने के लिए लगातार संघर्ष करते समय उसे आपके द्वारा बोले गए शब्दों को स्वीकार करना पड़ता हैभले ही वह जो बोलना चाहता था और आप जो समझ रहे हैं उसमें काफी अंतर हो। इसी स्थिति को फिल्म में दिखाया गया है। दुकानदार बहुत परेशान हो उठता है और सुधी आखिर में, दुकानदार के सुझाने पर गोभी खरीदने का निर्णय लेता है।


कृपया हकलाहट को दूसरी अन्य विकलांगताओंभिन्नताओं की तरह ही मानें। हकलाने वाले को पूरा अवसर दें। इससे हकलाने वाले व्यक्ति भी सामान्य परिस्थितियों में अच्छी तरह बातचीत कर पाएंगे और सामान्य व सम्मानजनक जीवन जी पाएंगे।

गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

मैडिटेशन कैसे करे

                                        मैडिटेशन कैसे करे 

दोस्तों आज आपके साथ में वो बात शेयर करना चाहता हु जो मुझे अपनी कॉलेज लाइफ के स्टार्टिंग के टाइम सिखने को मिली में । जिस बन्दे ने मुझे वो जानकारी दी वो और कोई नही मेरे कॉलेज लाइफ के बेस्ट टीचर अर्जुन सर । उन्होंने ही मुझे मैडिटेशन के बारे में बताया था । जब मेने उनसे ये बात सुनी तो मुझे विश्वास नही हुआ । पर ये सत्य है ये मुझे प्रेक्टिकल करके मिला । फिर उन्होंने हमे एक मूवी भी दिखाई the secreat और यही वो पल था । जब से मेने इसको फॉलो करना और इसके बारे में अधिक जान ने की कोशिस की में अब आपको वो बता बताता हु ।
मैडिटेशन
जब कभी मन किसी एक चीज पर नहीं लग पाता तब इंसान बे वजह परेशान हो जाता है। इंसान को समझ नहीं आता कि वो क्या करे। किसी एक जगह पर मन स्थिर ही नहीं हो पाता है। लेकिन इसके लिए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। मेंडिटेशन के जरिए आप अपने मन की गती को रोक सकते हो। आज आपको प्राचीन समय में किये जाने वाले मेडिटेशन यानि ध्यान करने का असली तरीका क्या होता है। उसके बारे में जानेगें। ताकि आप बेवजह की परेशानी से मुक्त हो सको साथ ही आपकी सेहत और उम्र दोनों बढ़े।
मेंडिटेशन ध्यान का सही मतलब
अपने दिल, दिमाग और मन को इधर उधर भटकने से रोकने के लिए किसी एक चीज(object) पर स्थिर करने को ही ध्यान कहा जाता है।
ध्यान करने से गुस्सा, मानसिक तनाव, प्रैशर, टेंशन आदि से आपको कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसलिए ध्यान सबसे बड़ी शक्ति है। प्रतिदिन ध्यान करने से आपका मन तो नियंत्रित होता है साथ ही एकाग्रता और मानसिक दबाव से मुक्ति मिल जाती है। जिस दिन इंसान को ध्यान की सही वजह मालूम पड़ जाती है। तब वह इंसान भीड़ से अलग अपनी पहचान बना लेता है। लेकिन दिक्कत यह है कि किसी को पता ही नहीं होता है ध्यान यानि मेडिटेशन कैसे किया जाता है।
मेडिटेशन से पहले ध्यान रखें ये चीजें
1. शांत, साफ और खुला हवादार जगह पर ही मेडिटेशन करें।
2. ध्यान करने से पहले शरीर बिलकुल सीधा हो और तनाव रहित होना चाहिए।
3. जल्दबाजी में ध्यान न करें।
4. यदि आप पहले से ही किसी बीमारी से ग्रसित हों तो ज्यादा देर तक ध्यान न करें।
5. ध्यान करने के लिए आपका मुख उत्तर या पूर्व की दिशा की तरफ होना चाहिए।
6. अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी एक चीज को ध्यान केंद्रित करने का साधन बनाएं जैसे उगते सूर्य का चित्र अपने मन में बना सकते हैं या अपने गुरू का या चक्रों का। किसी भी एक चीज को अपने मन में बसा लें और सिर्फ उसी तरफ ध्यान लगाएं।
7. ध्यान आपको हमेशा करना है।
8. भोजन हमेशा आपको साधा खाना चाहिए।
9. ध्यान आपको खाली पेट ही करना चाहिए।
मेडिटेशन करने के वास्तविक टिप्स
मेडिटेशन करने के लिए आप पहले सुखासन में बैठ जाएं यानि पालती मारकर बैठें। रीढ़ की हड्डी, सिर और गर्दन को बिलकुल सीधा रखें। अब आंखों को हल्का बंद करें। ध्यान रखें आंखे ढ़ीली बंद हो। पूरे शरीर को बिलकुल तनाव मुक्त रखें। अब अपनी सांसों पर अपना ध्यान केन्द्रित करें। जैसे जैसे आपकी सांसे चल रही हैं उन पर ही अपना ध्यान लगाएं। लेकिन इस समय आपके मन में दुनिया के सभी विचार आने लगेगें साथ ही आपका ध्यान भटकेगा। लेकिन आप इन विचारों को आने दें और धीरे-धीरे इन विचारों को मन से हटाते रहें। उनके बारे में ज्यादा सोचे नहीं और सांसों को लंबा और गहरा लेते हुए ध्यान करें।
जब लंबी सांस लें तब ओम् का जप करें और जब सांस छोड़ें तब भी ओम् का जाप करें। थोड़ी देर तक एैसा करने के बाद फिर सासों को सामान्य तरह से लें। जैसे ही लंबी सांसे लें वैसे मन ही मन में ओम् का जाप करें। लेकिन यदि फिर भी मन इधर उधर होने लगे तो फिर से मन को वापस एकाग्र करें। बार-बार करने से आपका मन एकाग्र होने लेगेगा। मन में इधर उधर के विचार आना सामान्य बात है। इन्हें दबाएं नहीं और आप ध्यान अपनी सांसों की तरफ लगाएं। धीरे-धीरे विचार खत्म होगें और आपका मन स्थिर होने लगेगा