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शनिवार, 31 अक्तूबर 2015

L हकलाना उम्र बढ़ने के साथ- साथ बढ़ता हैं ऐसा क्यों ?

L हकलाना उम्र बढ़ने के साथ- साथ बढ़ता हैं ऐसा क्यों ?
;जैसा आप कि आप जानते हैं कि जहां भी आप ठीक बोलना चाहते है वही आप अधिक हकलाते है तो उम्र बढने के मुताबिक हर व्यवित ठीक ही बोलना चाहता हैं। ठीक व शुध्द बोलने की सोचते ही दिमाग का ध्यान समस्या पर जाने से घबराहट के कारण व्यवित अधिक हकलता है। यदि ध्यान समस्या पर न जाये तो हकलाना स्वयं बंद हो जायेगा। इसीलिये उम्र बढ़ने के साथ -साथ हकलाना भी बढ़ता जाता हैं लेकिन जो व्यवित इस समस्या को अधिक महसूस नहीं करते ,उनका हकलाना धीरे धीरे कम भी हो जाता है इसीलिये कुछ ई. एन.टी.विशेषज्ञ यह सलाह देते है कि उम्र बढ़ने के साथ मरीज ठीक बोलने लगेगा लेकिन हकलाने को 100 %दिमाग से निकलने के लिये सेन्टर में आना ही चाहिये।  click here

हकलाने वाले व्यवित अपनी हर असफलता का कारण हकलाहट को ही मानते है क्यों

 हाँ मै कई बार हकलाने वालों से सना हूँ कि सर यदि मैं नहीं हकलाता तो मै इंजीनियर बनता ,टीचर बनता ,नेता बनता या अन्य क्षेत्र में बहुत आगे होता। यह हकलाहट हमारे लिये बाधक हैं। मैं बहुत सारे असफल लोगों से मिला हूँ जैसे आप अपनी असफलता का कारण हकलाहट को मानते हैं ,ठीक उसीप्रकार बहुत से असफल सामान्य व्यवित अपनी असफलता का कारण गरीबी ,सही गाइड लाइन न मिलना ,पिता शराबी होना ,माँ की बचपन में मृत्यु हो जाना ,बचपन में पिता की मृत्यु हो जाना ,सही स्कूल में न पढ़ना ,सही टीचर का न पढ़ना स्कूल गांव से दूर होना ,लड़की होना ,सही लड़की से विवाह न होना आदि मानते हैं लेकिन ऐसा नहीं हैं जो लोग मेहनत करते है ,वह इन समस्याओं के होते हुये भी बहुत आगे बढ़ते हैं। इन समस्याओं को झेलते हुये जो व्यवित आगे बढ़ सकता है वही सफल व्यवित होता है तो आप भी हकलाहट होते हुये भी बहुत आगे बढ़ सकते सकते है। बस आवश्यकता हैं उठ कर खडे होने की ,हकलाहट के प्रति नजरिया बदलने की। हकलाहट से दोस्ती करने की। किसी व्यवित के पिता की मृत्यु हो गई तो उसके पास दो रास्ते हैं। पहला वह जीवन रोता रहे कि मेरे पिता होते तो मै ऐसा कर लेता ,वैसा कर लेता और दूसरा रास्ता यह हैं कि पिता तो चले गये उन्हें भूलो और योजनाबध्द तरीके से जीवन में काम करो। आप पायेंगे कि आप बहुत आगे पहुँच जायेंगे। पिता अब भगवान के पास से देखकर खुश होंगे ,आप पर नाज करेंगे कि मेरे न रहते हुये भी मेरा बेटा बहुत आगे जा रहा हैं और यदि पिता की याद कर -कर के आप आगे नही बढ़ेगे तो पिता की आत्मा को भी तकलीफ होगी की मै अपने बेटे के लिये सब कुछ छेड़ कर आया लेकिन यह वेवकूफ कुछ नही किया समस्या का खोजों ,समस्या निमिर्त मत करो।उसीप्रकार आप भी सीख सकते हैं। चूंकि यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमे मेडिसीन कम लगती है ,इसमे आत्मविश्वास ,मेहनत लगन Acceptance एवं साइकोलॉजिकली मेथड की आवश्यकता होती हैं। हकलाने वाला व्यवित लम्बे समय से पीड़ित होता हैं। हरतरफ से हताश हो जाता है। इसीलिये उसको यह विश्वास नही होता है कि मैं ठीक हो जाउंगा।   click here

सर हमें और हमारे घरवालों को यह विश्वास ही नही होती कि मैं ठीक हो जाऊगा ,ऐसा क्यों

i सर हमें और हमारे घरवालों को यह विश्वास ही नही होती कि मैं ठीक हो जाऊगा ,ऐसा क्यों ?;प्रिय मित्रों ,आपको तो मेरी संस्था एवं मुझपर विश्वास नही हैं लेकिन जब मै परेशान और हकलाता था तो मुझे दूसरी संस्था ,डाकटर में विश्वास तो बिल्कुल नहीं था। यहाँ तक कि अपने आप पर भी विश्वास नही था। डाक्टर ,वकील ,पुलिस इन तीन पर विश्वास करना ही होता है। मेरी आपको सलाह यह है कि आप किसी पर विश्वास मत कीजिये ,यहाँ तक कि अपने आप पर भी विश्वास मत कीजिये ,विश्वास कीजिये अपने कार्य ,मेहनत ,लगन पर। जैसे लोग गाना गाना सीख जाते है , डान्स करना सीख जाते हैं , 

शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2015

हकलाने वाले व्यवित बहुत पीछे क्यों रह जाते हैं

D हकलाने वाले व्यवित बहुत पीछे क्यों रह जाते हैं ?; हकलाहट के कारण हम पीछे नहीं रह जाते है ब्लीक हकलाहट का डर हमें पीछे ले जाता है। यह आपकी साइकोलॉजिकल सोच है। ऐसा नहीं हैं ,आपको पता है कि रितिक रोशन जो फ़िल्म एक्टर हैं ,उनके मुँह से एक शब्द नहीं निकलते थे ,वे हकलाते थे और आज फिल्मों में अकबर के उर्दू डायलाग बोलते है। रितिक रोशन जी ने स्वयं स्टार टी.वी. में बतलाया हैं। उनका इंटरव्यू हमारी बेवसाइट पर आज भी उपलब्ध है ,आप देख सकते है। हकलाने वाले कई लोग डॉकटर ,इंजीनियर ,वकील ,टीचर ,पत्रकार ,नेता बन चुके हैं। हाँ ये बात सत्य हैं कि थोड़ी मेहनत और हकलाहट के पति अपना नजरिया बदलना पड़ेगा। तो आप यह नही कह सकते कि हकलाने वाले लोग यह नहीं कर सकते ,वह नही कर सकते। क्या सभी सामान्य लोग उचाइयां छूते हैं ?नही ना। कुछ सामान्य लोग जो मेहनत करते हैं ,वही सफल होते हैं ,वही हाल यहाँ भी हैं। जो मेहनत करते है वही लोग यहाँ भी सफल होते है। सफलता का शार्टकट नही होता है।

सोमवार, 19 अक्तूबर 2015

स्पीच थेरेपी ,साइको थेरेपी , सपोर्ट ग्रुप SHP & नेशनल कॉन्फरेंस

 क्रमांक 
 स्पीच थेरेपी 
 साइको थेरेपी 
 सपोर्ट ग्रुप  SHP 
 नेशनल कॉन्फरेंस 
 01  उपयोग  की जाने वाली विधि 
 इसमे स्पीच ओर्गन्स की एक्शन प्रोसेस  को कंट्रोल करने में जोर दिया जाता है  
 इस में डर , शर्म , शंकोच , हीनभावना  को कंट्रोल करने  में जोर दिया जाता है 
 इन दोनों टेक्निक  या किसी एक टेक्निक  को कही से सीखता है और फिर अन्य PWS  को अपने अनुभव शेयर करता है इनके अनुभव  आप के काम आ सकते है और नहीं भी आ सकते है  
 बहुत सारे pws  एक ही जगह में मिलते है और अपना अनुभव शेयर करते है  कुछ फेमस टेक्निक का प्रदर्शन भी करते है  
   इस के अनुसार
   इस के अनुसार हमारे स्पीच ओर्गन्स की वर्किंग  प्रोसेस  गलत होती है इस लिए हमारी आवाज में डिसऑर्डर  पैदा होता है 
और इस डिसऑर्डर के कारण  मन में डर , शर्म , शंकोच , हीनभावना  पैदा होती है  यहाँ पर स्पीच)थेरेपिस्ट होते है जो क्वालिफाइड होते है इनके पास 
 इस के अनुसार  सबसे पहले हमारे मन में डर  आता है , फिर इस डर  के कारण  हमारे स्पीच ओर्गन्स की वर्किंग  प्रोसेस गलत हो जाती है  और लगातार यह प्रोसेस रिपीट होने से मन में डर , शर्म , शंकोच , हीनभावना  पैदा होती है
 इन के अनुसार  एक pws  दूसरे  new pws  की  हेल्प कर सकता है और काफी हद तक वह स्टंमेरिंग  को overcome  कर सकता  है  यहाँ कोई स्पेशलिस्ट नहीं होता 
 यहाँ एक इमोशनल सपोर्ट मिलता है  जब आप अपने जैसे बहुत सारे  लोगो  लोगो  से मिलते है तो आप को एक विश्वास मिलता है की  जब इतने सारे लोग हकलाते है और निजी जिंदगी में सफल है तो मै  भी सफल हो सकता हु 
 क्वालिफिकेशन 
 [BSc (स्पीच एंड हियरिंग ) BSLP  MSLP  DSPL  DSH
बहुत सारे MS (ENT ) भी स्पीच थेरेपी देते है परन्तु यह लोग बीमारी के स्पेशलिस्ट है न की स्पीच डिसऑर्डर के , इस लिए इनका  थेरेपी देना का तरीका    
MA (Psychology )  PhD (Psychology)   MD ( Psychritiesc, Neurologist  Neurologist  surgen  
लगभग लगभग क्वालिफाइड  पर वयक्ति कोई नहीं होता , इनमे से कुछ लोग क्वालिफाइड व्यक्ति द्वारा थेरेपी  लिया हुआ होता है  
कुछ क्वालिफाइड  लोगो को बुलाया जा सकता है पक्का नहीं यही 
समय  
ये लोग 1 -2  घंटे डेली और 5 -6  महीने का टाइम मांगते है अधिकतर स्पीच थेरेपी सेंटर आवासीय नहीं होते है भारत में कुछ गिने चुने शहरों में है , आवासीय स्पीच सेंटर वाले लगभग एक महीने का टाइम  लेते है 
ये लोग 1 -2  घंटे डेली और 5 -6  महीने का टाइम मांगते है अधिकतर साइको थेरेपी सेंटर आवासीय नहीं होते है भारत में कुछ गिने चुने शहरों में है में ही आवासीय है आवासीय साइको थैरेपी  वाले लगभग एक महीने का टाइम  लेते है 
ये वीकली या मंथली मिलते है  और एक दूसरे को सीखते है टाइम का कोई लिमिटेशन   
यह वर्ष में 1-2  बार होता है 
कंट्रोल होने का टाइम 
5 दिन से 6  महीने का टाइम स्पीच थेरेपिस्ट ले सकते है 
5 दिन से 6  महीने का टाइम साइको  थेरेपिस्ट ले सकते है 
लाइफ टाइम तक मीटिंग अटैंड करना होता है  आप की मर्जी के अनुसार  जब मन हो जाओ न मन हो न जाओ 
लाइफ टाइम तक मीटिंग अटैंड करना होता है  आप की मर्जी के अनुसार  जब मन हो जाओ न मन हो न जाओ 
अच्छी सफलता   के लिए  क्या करे ?
जिस जगह सिक्स  मेथड एक साथ अप्लाई होती हो वह  थेरेपी लेनी चाहिए
स्पीच जिस जगह सिक्स  मेथड एक साथ अप्लाई होती हो वह  थेरेपी लेनी 
थेरेपी  लेने  के बाद  मोटिवेशन एंड refresh  के लिए बीच बीच में जाते रहना चाहिए 
बहुत अच्छा मोटिवेशन के  लिए  NC  अटैंड  करना चाहिए 







शनिवार, 17 अक्तूबर 2015

थेरेपी और सावधानी रखनी चाहिए

                           थेरेपी लेने के बाद हमें क्या क्या सावधानी रखनी चाहिए
                                                     थेरेपी लेने के पहले
- यदि आप किसी थेरेपी सेंटरस / स्टंमेरिंग सेन्टर / सुपोर्ट ग्रुप /नेशनल कॉन्फरेंस में  थेरेपी लेने जाने की प्लानिंग कर रहे है  तो निम्न लिखित बातो का ध्यान रखना चाहिए
1 -समय----- टाइम ले कर जाना चाहिए क्यों की हकलाहट का ट्रीटमेंट चमत्कारी  मेथड से नहीं हो सकता  यदि आप टाइम ले कर नहीं जाते तो आप का मन घर में /ऑफिस में / स्कूल /कालेज में लगा रहेगा और आप सही तरीके से थेरेपी नहीं ले पाओगे  और आप को  किसी भी तकनीक पर विश्वास नहीं होगा अतः टाइम का प्रेशर  पैदा ना  होने दीजिये । आप के लिए आर्गेनाइजर  जो टाइम रिकमेंड किया है उतना टाइम दीजिये और लास्ट में एक बार कहिये की यदि और टाइम जी जरुरत हो तो मै  दे सकता हूँ। चुकी स्टंमेरिंग  एक आर्ट है यहाँ टाइम लगता है क्लिक हियर 

2 -मन  की एकाग्रता  -   रियल  बात यह है की कोई हकलाने वाला व्यक्ति इतना सहमा /डरा / संकोची  होता है की उसका विश्वाश किसी डॉक्टर / स्पीच थेरेपिस्ट / पर बिलकुल विश्वाश तो होता ही नहीं है यहाँ तक की उसे अपने आप पर भी विश्वाश नहीं होता है जब वह कोई टेक्निक सीख रहा होता है तब तब भी शंका में घिरा रहता है की मै  यह टेक्निक मेरे लिए ठीक है , यह मेरे काम की है की नहीं , वह सस्पेंस में रहता है  ।  तो मई आप को बिलकुल साफ साफ बोलुँगा की आप कही भी टेक्निक सीखिये मन से सीखिये , जो कोई टेक्निक सिखाई जाये तो पूरा मन को एकाग्र कीजिये ( मोबाइल /कॉल/ sms / फेसबुक / किसी फ्रेंड की याद /घर की याद / परीक्षा की चिंता को हाबी  ना  होने  देवें / मै कई  बार फील किया हूँ  की मेरे  बहुत से ऐसे PWs  है जो इन्ही  में खोये रहते है , और सारी  एनर्जी   इन फालतू की बातो में खर्च कर देते है  और टेक्निक सिखने को सब से लास्ट की लिस्ट में
रखते है ऐसी फर्स्ट लिस्ट में रखना होगा मन को एकाग्र करके सीखना होगा और रियल लाइफ में उपयोग करना होगा click 
3 - पैसा - दोश्तो यह सबसे बड़ा पैरामीटर है । हम सब बेटर सुविधा काम पैसे में खोजते है ( सही भी है ) पर रियल में यह पॉसिबल नहीं है  यदि कोई बहुत काम पैसे लेकर आप को थेरेपी दे रहा है तो कई सवाल खड़े होते है  सच्चाई  तो यह है की अच्छी सुविधा के लिए अच्छा पैसा खर्च करना पड़ता है फिर भी हमें गूगल भगवान से एक बार पूछ लेना चाहिए यह  गूगल से देख लेना चाहिए की किस किस सेंटर की कितनी फीस है क्या क्या सुविधाये है ,कौन कौन  सी तकनीक सिखाई  जाएगी , अनुभव कितना है , क्वालिफिकेशन कितना है , सेल्फ़  का हॉस्टल है की नहीं ,थेरेपी कितने घण्टे डेली होती है, सारी सुविधा से संतुष्ट  होने पर ही अपना अगला कदम बढ़ाना चाहिए  यदि किसी सेंटर की फीस अधिक है और  अच्छी सुविधा दे रहा है तो थेरेपी लेना चाहिए   क्लिक हियर 

4 - पता कीजिये की  स्पीच थेरेपी है /साइको थेरेपी/ या दोनों है ----- बहुत सारे स्पीच थेरेपिस्ट  केवल स्पीच थेरेपी 1 -2  घंटे डेली याद साप्ताहिक देते है  और कुछ नहीं सीखते है केवल धीरे  धीरे बोलना सीखा देते है  और बोलते है की ऐसे ही रियल लाइफ में बोलो जो पॉसिबल नहीं होता है , साथ में साइको थेरेपी भी जरुरी है जिस से आप का डर  निकलता है मेरे हिसाब से सिक्स प्रोसेस होती है  स्तम्मेरिंग को ओवरकम  करने के लिए  और   
 यही 6  आप की हेल्प करेगी 1 स्पीच थेरेपी 2 -साइको थेरेपी 3 - मेडिटेशन  4 मेडिकेशन  5  - adjuster ( optional )6 -सपोर्ट ग्रूप 
 जिस सेंटर में यह ६ प्रोसेस फॉलो की जाती हो वह एक अच्छा सेंटर माना जा सकता है  click 

5 - ऐसे बहुत सारे PWS  है जो अपने फैमिली को बिना बताये  ज्वाइन करते है  और सोचते है की अभी नहीं बताउगा ठीक होने पर बता दुगा ।  ऐसा करने से आप को काम फायद होगा क्यों की आप को आर्थिक ,सामाजिक पारिवारिक  मौहौल नहीं मिलेगा और यहाँ से जाने के बाद आप घर में रूल्स फॉलो नहीं कर पाओगे  और आप  समय / पैसा / मेहनत  सब बेकार  हो जायेगा । आप को अपनी फैमली मेंबर की हेल्प लेनी चाहिए
6 वर्षाती  मेढ़को से बच कर रखिये - बहुत सारे ऐसे भी लोग होते है जो थोड़ी दिन की थेरेपी या एक दो सपोर्ट ग्रुप या NC  अटेंड कर लिए और अपने आप को स्तम्मेरिंग एक्सपर्ट मानाने लगते है ।  कुछ लोग बहुत अच्छे भी है जो रियल में आप की हेल्प करेंगे , ऐसी बहुत  आर्टिकल्स /वेबसाइट/ब्लॉग /फेसबुक  में पेज है जो आधे अधूरे है लिखा कुछ है रियलिटी कुछ और ही है  ऐसे ही मुझे एक वेबसाइट मिली जिस को कॉल किया वह बोलता है मै  आप को ठीक कर दुगा मै  कंप्यूटर एक्सपर्ट हूँ बिजी हूँ २ वर्ष पहले साइट बना दिया था आप टाइम नहीं दे पता पर आप को ठीक कर दुगा आप मुझे कल सुवह सात बजे कॉल कीजिये । ऐसे बहुत सारे पेज है जो बना तो दिए गए है पर वर्क जीरो है  यहाँ पर आप अपना टाइम ख़राब करेंगे इस से बच कर रहना है "नीम हाकिम खतरे की घंटी " cilck 
7 - यह सोच कर किसी  भी स्पीच  थेरेपी सेंटर में मत जाइये  की मै जब लौटुँगा हो 100 % ठीक हो कर लौटुँगा , जैसे किसी व्यक्ति के ऑपरेशन के जस्ट  बाद 100 % गुड फील नहीं करता, कुछ दर्द , कुछ तकलीफ  रहती है ( किसी किसी की प्रॉब्लम ऑपरेशन के बाद बढ़ भी जाती है कुछ समय के लिए )   घर जा कर कुछ दिन तक मालिश पट्टी दवाई खाने से धीरे धीरे आराम मिलना चालू हो जाता है । ठीक वैसे ही हकलाहट में होता है थेरेपी लेने के बाद कुछ दिन आप को घर में भी मेहनत करनी ही पड़ेगी  आप चाहे (थेरेपी/ सपोर्ट ग्रुप /नेशनल कॉन्फरेंस में  ) कही भी ले  पर  घर में केयर  करना ही पड़ेगा,  रियल लाइफ में तकनीक का उपयोग करना ही होगा click 
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                                                     थेरेपी लेने के बाद  
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दोश्तो आप को यह जानना जरुरी है की थेरेपी लेने के बाद  आप को क्या क्या सावधानिया रखनी चाहिए  तो आज मै  आप को यहाँ यह बताउगा की आप जब थेरेपी ले कर लौटे हो क्या क्या सावधानी रखना चाहिए 
1 - अपने आप को अड़ियल  न दिखाए - थेरेपी लेने के बाद आप आदमी यह सोचता है की आप मै स्पीच रूल्स  फॉलो क्या करू , और हकलाने वाले अक्सर यह सोचते /खोजते  नजर आते है  की ऐसा कौन सा दिन होगा जब काम स्पीच रुल फॉलो न करेंगे और बहुत  अच्छा बोलेगे ।  मेरे अनुभव  कहते है की ड्राविंग सीखते के बाद ऐसा शायद  ही  कभी वो दिन आये जब आप बिना  ब्रेक, क्लिच,  एक्सीलेटर ,  पेट्रोल  का  बिना उपयगो किये  गाड़ी ड्राइव कर  पाओगे , मेरे हिसाब से यह सोचना गलत है । सोचना यह चाहिए  की जम  कर रूल्स फॉलो  करुगा और गाड़ी सावधानी  पूर्वक ड्राइव करुगा  तभी हमारी यात्रा सफल होगी । ठीक इसी  प्रकार एक हकलाने वाले व्यक्ति को सोचना चाहिए की थेरेपी का मतलब  बोलने  के रुल्स  सीखना होता है  और रूल्स सिखने के बाद इन रुल्स  को फॉलो करना और रियल लाइफ में फॉलो  करना हमारा प्रथम लक्ष्य होना चाहिए । 
2 - अपनी हकलाहट  को छुपाने से बचे - 
3 - रियल लाइफ में टेक्निक का उपयोग कीजिये 
4 -रेगुलरिटी  का ध्यान दीजिये 
5 - हकलाहट को मैनेज करना सीखिये 
6 - सुनाने की भी आदत डालिये 
7 - click 

गुरुवार, 15 अक्तूबर 2015

स्पीच थेरेपी Vs साइकोथेरेपी और हकलाहट

                                      स्पीच थेरेपी  Vs  साइकोथेरेपी  और  हकलाहट 
हमारे बहुत से हकलाने वाले भाई बहन बहुत कन्फ्यूज्ड है  स्पीच थेरेपी और साइकोथेरेपी  के बारे में  इस लिए मई आज कुछ कन्फ्यूजन  दूर करुगा

 S No 
  स्पीच थेरेपी
 साइकोथेरेपी
 1 
 इसमे स्पीच ओर्गन्स की एक्शन प्रोसेस  को कंट्रोल करने में जोर दिया जाता है  
इस में डर , शर्म , शंकोच , हीनभावना  को कंट्रोल करने  में जोर दिया जाता है 
 2 
  इस के अनुसार हमारे स्पीच ओर्गन्स की वर्किंग  प्रोसेस  गलत होती है इस लिए हमारी आवाज में डिसऑर्डर  पैदा होता है 
और इस डिसऑर्डर के कारण  मन में डर , शर्म , शंकोच , हीनभावना  पैदा होती है 
 इस के अनुसार  सबसे पहले हमारे मन में डर  आता है , फिर इस डर  के कारण  हमारे स्पीच ओर्गन्स की वर्किंग  प्रोसेस गलत हो जाती है  और लगातार यह प्रोसेस रिपीट होने से मन में डर , शर्म , शंकोच , हीनभावना  पैदा होती है
 3 
 यदि हम स्पीच ओर्गन्स की वर्किंग प्रोसेस को कंट्रोल कर ले तो  शर्म , शंकोच , हीनभावना   अपने आप कंट्रोल हो जाएगी  
 ऐसा बिलकुल नहीं है, हम कितना  भी स्पीच ओर्गन्स की वर्किंग प्रोसेस को कंट्रोल करे पर डर  कंट्रोल नहीं हो सकता  इस को कंट्रोल करने के लिए सामना करना होगा , जैसे भूत  के डर  को निकालने  के लिए भूत  से दोश्ती करनी ही पड़ेगी , भूत से दोश्ती होने पर ही बहुत का दर कंट्रोल हो सकता है 
 4 
 हकलाहट  को कंट्रोल करने के लिए अधिकतर स्पीच थेरेपिस्ट स्लो रीडिंग , धीरे बात करना 
 जब की Psychotherapist  इमोशन , डर  हिनभवना  को कंट्रोल करने की प्रोसेस पर जोर देते है । और  acceptance , के लिए बोलते है 
 शब्द के पहले लेटर को खीच कर (या थोड़ा लम्बा ) कर के बोलना सीखते है  प्रोलोंगशन  मेथड का उपयोग करते है 
बोउन्सिंग मेथड का उसे करते है इस में कुछ शब्द के फर्स्ट लेटर की साउंड को जान बूझ  कर  रिपीट  कर के बोलने के लिए कहा जाता है 
इस से PWS  को फ़ास्ट  रिलीफ  मिलता है  और कॉंफिडेंट बहुत जल्दी बढ़ता है बहुत सारे स्पीच थेरेपिस्ट इस मेथड का उपयोग करते है, सारी इमोशनल इनर्जी को मेथड को फॉलो करने में खर्च करना होता है, कभी कभी एमोशनल  एनर्जी काम पड़ जाती है तो मेथड फॉलो करना मुश्किल हो जाता है 
थोड़ा देर से रिस्पॉन्स  मिलता है, स्टार्टिंग में हकलाने वाले प्रॉपर सपोर्ट  नहीं करते किसी किसी की हकलाहट कुछ समय के लिए बढ़  भी जाती है |  पर यदि एक लम्बे समय तक इसको फॉलो किया जाये तो बहुत बेटर रेस्पॉन्स आता है सारे सोशल संगठन  जैसे TISA ,BSA , इसी  को जोर देते हैं  
इस मेथड में  हकलाने वाला अपने हकलाहट को  छुपाने में  एक्सपर्ट हो जाता है । इस मेथड में  हमेशा  डर  बना रहता है की हकला गया तो मेरी बेज्जती  होगी, बदनामी  होगीं, पर बहुत जगह यह मेथड सफल भी है क्षणिक  लाभ बहुत जगह होता है । ऐसे बहुत सारे हकलाने वाले लोग है, जो इस मेथड का उपयोग  कर के , बहुत सारे लोगो  से  बात कर लेते है , बहुत सारे इंटरव्यू  पास कर लेते है , और लाइफ को सफल बना लेते है, पर अंदर से खुलापन नहीं आता है, थोड़ा डर  हमेशा बना रहता है   
 इस मेथड में  हकलाने वाला  अपनी  हकलाहट को बताने, दिखाने, Acceptance   के लिए एक्सपर्ट हो जाता है,  थोड़ी सी  हकलाहट के साथ बोलता है, पर डर  हीनभावना से काफी  हद तक  मुक्त हो जाता है, और जो ऊर्जा हकलाहट को छुपाने में खर्च कर रहे थे, वह ऊर्जा बच जाती है  , और किसी दूसरे  काम में आती है,  इनके अंदर एक समझ पैदा होती है की हाँ  मै  एक हकलां  व्यक्ति हूँ , और हकलाते हुए ,इसको मैनेज करते हुए, अपनी लाइफ को कैसे एन्जॉय करे , धीरे धीरे साऱी  इमोशनल एनर्जी  सेव होने लगती है , और वह अपने आप को एक बेहतर प्लेट फॉर्म में खड़ा हुआ पता है 


                                            Fees detail   click here

बुधवार, 14 अक्तूबर 2015

जॉब ( नौकरी) एंड हक़लानां

                                                         जॉब एंड हक़लानां   क्लिक हियर 
दोश्तो मुझे यह टॉपिक इसलिए लिखना पड़ा क्यों की बहुत से pws  तो किसी तरह ( लड़ कर/ छुपा पर / अपनी इंटेलिजेंसी से ) बहुत आगे है, मै यहाँ तक कह सकता हूँ  की एक आम  आदमी से भी अधिक सफल है, और मै इनकी हिम्मत और मेहनत  को सलाम करता हूँ।  पर दूसरी सच्चाई यह भी है की बहुत से हमारे ऐसे pws दोश्त है जो काफी  हाई डिग्री ले कर हकलाने के वजह से  घूम रहे है और कही भी जॉब नहीं मिल रहा है. ऐसा भी नहीं है की यह लोग प्रयास नहीं कर रहे है । पूरा प्रयाश कर रहे है, फिर भी सफला नहीं मिल रही है।  अब सवाल यह है की ऐसा क्या किया जाए की इनको हेल्प मिल सके, दोश्तो मै बहुत बार सोचा और प्रयाश किया की एक ऐसा प्लेटफार्म बनाया जाये की जिस में हर PWS ( जो चाहे ) आ कर जॉब कर सके और साथ में पार्ट  टाइम थैरपी /सपोर्ट ग्रुप ले सके वो भी बिल्ल्कुल फ्री।  कई बार मेरे  प्रयाश में, लोगो को मेरा स्वार्थ दिखा,  ( शायद कही कोई मेरी सोच और वर्क में कमी रही होगी ) लेकिन पता नहीं क्यों बार बार मेरा मन कहता है की हकलाने वाले यदि एक साथ, एक ही प्लेटफार्म में, एक टीम भावना से, वर्क करे तो अपने  इंटेलिजेंसी को अधिक अच्छे से उपयोग कर सकते है, और अधिक खुलेपन के साथ लाइफ जी सकते है अपनी हकलाहट को अच्छे से मैनेज भी कर सकते है।
एक ऐसा प्लेट फॉर्म जिस में हर PWS  ( हकलाने वाले लोग person who  stammer  ) वर्क कर सके ,इसको रेडी करने में मेरे हिसाब से   ( जरुरी नहीं है की आप भी सहमत हो ) निम्न लिखित समस्याएं  आ रही है
1 - हकलाने वाले लोगो का PWS एजुकेशन अलग अलग एरिया में है, और सभी एरिया में एक साथ जॉब के अवसर पैदा  करना कठिन हो रहा है।  एजुकेशन के हिसाब से जॉब नहीं मिलने पर हर PWS  के मन में हीनभावना  या यौ  कहे बोरियत मह्सुश करते  है उनको अपनी एजुकेशन के हिसाब से जॉब चाहिए  और सही भी है।  मैकेनिकल इंजीनियर , केमिकल इंजीनियर  का काम कैसे कर सकता है  ?
2 - कोई भी बड़ा इन्वेस्टमेंट कर के ही बड़ी जॉब उपलब्ध्य करवाया जा सकता है यहाँ पर बड़ा इन्वेस्टमेंट  बड़ी पूंजी लगाना एक चुनौती है
3 - बने बनाये प्लाट फॉर्म  में चला बहुत आसान है पर प्लेटफार्म बनाकर चलना  चुनौती पूर्ण है  ( मैं  असंभव या कठिन नहीं बोल रहा हूँ )  
4- पता नहीं मेरा सपना कब पूरा होगा की  बहुत सारे PWS  एक साथ काम करे और अपने अंदर छुपी प्रतिभा को  पंख लगाकर  उड़न भर सके , उड़े खुले आकाश में , कोई डर  ना  हो , 100 % acceptance हो , सब अपने हो  , सब एक दूसरे की भावनाओ को समझ सके , सब एक दूसरे को सीखा सके , इस को सफल करने के लिए के लिए एक प्रयास  कर रहा हूँ  www.sanyogpoint.com    

Acceptance के फायदे

 Acceptance के फायदे
 1 . जब आप किसी से कहते हैं कि मैं हकलाता हूँ। तो आपका मन हकता है। अब मैं क्यों छुपाऊ !अब तो इसे पता चल ही गया है ,कि मैं हकलाता हूँ।
 2 . जब कभी आप दूसरी बार उस व्यवित से मिलते है। जिसके सामने आपने कहा था कि मैं हकलाता हूँ।  तब आपका मन कहेगा पिछली बार मैं इनसे कहा थाकि मैं हकलाता हूँ। इन्हे अवश्य याद होगा अब मैं क्या छुपाऊ। चाहें वे भूल ही क्यों न गये हों।
 3 . हमारे शरीर में कार्य करने की बहुत सारी एनर्जी होती है और हम शब्दों को बदलने ,शब्द को आगे पीछे करने छुपाने में खर्च कर देते हैं और अन्य कार्यो में पीछे रह जाते हैं। स्वीकार्य करने से आपकी इनर्जी बेकार खर्च नहीं होती हैं। और आप हर काम में सफल होने के लिए तैयार रहते हैं। 
 4 . स्वीकार्य करने के बाद टेन्शन कोध हीन भावना के लिए तैयार रहता है। 

शनिवार, 10 अक्तूबर 2015

voluntary stammering

                              voluntary stammering                                                                                                           '' मैं हक्लाता हूँ। ''  ऐसा बोलें मैं मैं हकलाता  हूँ। यहाँ पर यह बात ध्यान में रखिए कि जब आप हकलाते हैं , तब आपकी आवाज आपके कन्ट्रोल में नहीं होती है।  लेकिन जब आप स्वीकार्य करें तब सहज सरल भाव से स्पीड स्पीच आर्गन को कन्ट्रोल करके कहे मै मै मैं हकलाता हूँ। voluntary stammering के बारे में आगे विस्तार से बताया जायेगा। 

शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2015

Ground ruels ग्यारहवाँ नियम

                                            ग्यारहवाँ नियम    
जब आप धारा प्रवाह में बोलते हैं तो उस पर भी ध्यान दें ; - इस नियम में  बताया गया हैं,कि जब आप धारा प्रवाह में बोलते है। उस समय अपनी अवस्था और शरीर की गतिविधियों पर ध्यान दें मन में उन क्षणों को हमेशा ध्यान रखें जब अपने अच्छा और धारा प्रवाह में बोलते हों इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। अपने आपको हमेशा यह याद दिलाते रहें,कि आप में धारा प्रवाह बोलने की योग्यता है। 4. जब आप अपने आप से, घर में छोटे बच्चों से बिना झिझक शर्म संकेज आत्मग्लानि के यह कहने मे सक्षम हो जाये कि मैं मैं मैं ह ह ह हकलाता हूँ। तब आप अपने अच्छे मित्रों से भी कहना प्रारंभ कीजिए। और बीच-बीच में Voluntary stammering करते रहें। जैसे -मे मेरा नाम सू सू सूरज है। आ आपका ना नाम क्या क्या है। यह आपको थोड़ा मुशिकल और निगेटिव फिल हो सकता है। लेकिन करते रहें अवश्य जीत आपकी होगी।                                                                                      

ground ruels दसवाँ नियम

                                            दसवाँ   नियम
अपनी आवाज को बदल-बदल  कर बात करने का प्रयास करें जैसे बोलने की गति को बदल कर, आवाज की तीव्रता को बदलकर आदि। हकलाहट पर नियंत्रण पाने के प्रयास में आप बिलकुल धीमे न बोलने लगें या एक ही स्वर में इसे बदलते रहें।  प्राकृतिक भावनाओं और चेहरों के भावों का प्रयोग करते हुए आराम से बोलने का प्रयास करें।                                                    

ground rules नियम नौवा



                                                              नियम  नौवा                                                                                                                                                                  बोलते समय हमेशा आगे बढ़ने की आदत डालें मतलब बीच में न रुक जाए। इस नियम से मतलब यह है ,कि जब तक आवश्यकता  न हो तब तक कभी भी बीच में रुक कर शब्द न दोहराए।  मतलब जब आप किसी शब्द या ध्वनि की शुरुआत करें तो बीच में कभी भी उसे रोकने या शब्द को दुबारा बोलने का प्रयत्न करें। दूसरे शब्दों में, हमेशा यह प्रयास करें कि जो आप कहना चाहते हैं , यह कहे बिना दोहराए या वापस लौटे बिना।                                                                                                                                        

गुरुवार, 1 अक्तूबर 2015

FULLY PRACTICAL AUDIO

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pre block correction technique

                                                                             pre block correction technique                                                                                              जैसा कि हम देख चुके है, कि post block correction technique और ln block correction technique से हम अपने आप को तब ठीक करते है तब हकलाहट रही होती है या हों चुकी होती है। अब हम इस तकनीक में यह सीखेंगे कि कैसे अपनी हकलाहट पर नियंत्रण हकलाहट से पहले पाएगें। हम अधिकतर समय ,कठिनाई या समस्या के घटित होने से पहले ही उसके बारे में सोचने लगते हैं। तथ्य रूप में कहें तो हकलाहट को इस तरह भी कह सकते हैं कि "संघर्ष परिसिथतियों की आशा करना इसमें हम कठिनाई के बारे में सोचते हुए इनसे दूर भागने के लिए हरकतें करते हैं। यह तकनीक लगभग चवेज इसवबा की तरह ही है बस अंतर इतना ही होता हैं ,कि यह हकलाने से पहले इस्तेमाल की जाती हैं और post block हकलाने के बाद pre block correction क्रियाओ का कम                                                                                                                                                                                                                                                            
  1 .  इसमें जिस शब्द से डरते हो उस शब्द के आने से पहले अपने आप को पूरी तरह रोक ले।  यह रुकना आपको शान्त होने का समय देगा। और इस बात की रणनीति का मौका प्रदान करेगा का कि कैसे आने वालो कठिन शब्द का सामना करें।                                                                                                                            2 .  सभी तनाव के आए अंगों को शान्त करने का प्रयास करें खास तौर पर गले को।                                          3 . ध्यान करें कि आप क्या गलत करते है , जब आप हकलाते है।                                                                   4 . इस बात पर ध्यान दें, कि इस समय आपको क्या correction करने चाहिए।                                                 5 . अपने मुँह इन correction के प्रभाव का अनुभव करें। और श्वाँस को सामान्य हो जाने दें।                             6 . शब्द को बोले। बोलते समय शब्द को लम्बा खींचकर कर आसानी के साथ बोलें।      click  here                                                                                                                                                                                                                                                               

स्वयं चिकित्सा को प्रभावित करने वाले कारक

   Factors affecting self therapy   स्वयं चिकित्सा को प्रभावित करने वाले कारक ; 
- 1 . हकलाहट की समस्या के लिए स्वयं चिकित्सा से पहले हमें यहाँ पर कुछ कारकों के बारे में चर्चा कर लेनी चाहिए। ये कारक स्वयं चिकित्सा के प्रति हमारे व्यवहार को निधार्रित करते है।  आप इन कारकों पर काम कर सकते है।  2 . ये सभी कारक चिकित्सा से सम्बनिधत वे सभी जानकारी प्रदान करते हैं ,जो चिकित्सा की प्रगति में योगदान करते है।
 ये कारक निम्नलिखित हैं ; - click  here 
 1 भावना और मनोभाव।                
 2 तनाव और शिथिलता ( आराम पहुचाना )
 3 ध्यान हटाना
 4 किसी से सहयोग प्राप्त करना
 6 आपका संकल्प या प्रोत्साहन 
  1  भावना और मनोभाव ; - हकलाना कोई आसान वाणी  दोस नहीं है।  यह एक गम्भीर गड़बड़ी है। जिसके दोनो है शारीरिक पहलू और मानसिक समझाने के लिए यह कह सकते है, कि एक हकलाने वाला व्यवित्त हकलाहट को रोकने का जितना अधिक प्रयत्न करता है वह उतना ही अधिक हकलाता है। दूसरे शब्दों में कहे तो यह खुद के व्दारा बुना गया जाल है।  होता यह है ,कि जितना अच्छा बोलने का प्रयत्न करते है उतना ही अधिक आप अपने बोलने के अंगों पर तनाव डालते है। उतनी समस्या खड़ी करते है।इस बोलने की मशीन के कलपुर्जे बहुत ही  नाजुकता के साथ सामंजस्य में होते है। इसलिए जितना हम हकलाहट को रोकने का प्रयत्न करते हैं उतना ही अधिक हकलाते है।  हकलाने के कारण आप शर्म महसूस करने, हीनभावना से ग्रसित और खुद से नफरत  करने लग जाते हैं।  आपके यही मनोभाव धीरे धीरे आपके मन में चिंता और डर पैदा कर देती है जो आपको जीवन में आगे बढ़ने से रोकती है                                                                                                                                                                      यदि आप अपने आपको शर्म के प्रति उदाशीन बना ले तो आप बोलने के ढ़ग को बदल सकते हैं। एक व्यवित का कथन हैं ,कि जितना आप हकलाहट को बर्दाश्त नही कर सकते उतना ही हकलाएगे।
 2  तनाव और शिथिलता ;-चुकि डर हमारे अंदर काफी अधिक तनाव पैदा कर देता है , तनाव को कम करना ही चिकित्सा का मुख्य उदेश्य होना चाहिए।  डर व्दारा उत्पन्न तनाव का हकलाने से गहरा संबंध है।  अगर आप बिना कठिनाई के बोलने का प्रयत्न नहीं करेंगे तो उतना ही कम आप हकलायेंगे। तनाव को कम करने के लिए हम कई तरीके अपनाते हैं जैसे
 1  मादक वस्तुओं का प्रयोग जैसे ' शराब आदि। परन्तु इससे कोई पूर्ण लाभ नहीं मिलता                                  2 . कई दवाये भी आती है ,जो डर और चिन्ता को कम करती है।  परन्तु इनके कई दुष्परिणाम भी होते है।  
3 , इसकी सलाह भी दी जाती है , कि योग तनाव को कम करने में सहायक है। मन को शान्त करने की तकनीक सीखना आपके बोलने के लिए अच्छा है। जितना ज्यादा आप तनावमुक्त और शान्त रहेंगे उतना ही कम हकलाऐगे।  इसके लिए आपको ऐसे व्यायाम करने चाहिए जो आपको अपने ओठों ,जीभ , मुँह , स्वांश और कुछ हद तक को नियनित्रत करने में सहायता करती है।  यह सलाह दी जाती है ,कि व्यवित को हमेशा योगा करना चाहिए क्योंकि यह उसके आत्म विश्वास को बढ़ाता हैं , जिसकी सभी हकलाने वालों को आवश्यकता हैं। हमेशा अपने आप को कहते रहें कि आप आपकी समस्या पर पूरी तरह नियन्त्रण पा लेंगे।                
3  . ध्यान हटाना ;- यदि ऐसा कोई रास्ता हो ,कि आपका ध्यान डर से हट जाए तो आप बिल्कुन नहीं हकलाते है।
 4  . किसी से सहयोग प्राप्त करना ;- यह बहुत ही अच्छी बात आपके लिए होगी की आप किसी स्पीच लैंग्वेज डॉकटर जिसने हकलाहट के समबन्ध में काम किया हैं ,से सहायता प्राप्त कर सके।  लेकिन स्वयं चिकित्सा इस प्रकार संयोजित की गयी हैं ,कि आप किसी की सहायता के बिना अपना इलाज कर सकें। यदि आपके पास यहयता हो तो भी चिकित्सा की सफलता अधिक से अधिक आपके प्रयासों पर ही निर्भर करती है।  आप चिकित्सक के अलावा कई लोगों की सहायता ले सकते हैं ;- जैसे  ( 1 ) परिवर के सदस्य ( 2 ) कोई दोस्त ( गहरा ) वह आपकी हर मोड़ पर गलतियों और सफलताओं के बारे में बताता रहेगा।
5 - आपका संकल्प ;- तुरन्त ही धारा प्रवाह में बोलने लगने का कोई आसान रास्ता नही है।  आपका दृढ संकल्प ही आपको हकलाने की समस्या से लड़ने में सहायता करेगा।  और यह भी हो सकता है इलाज की शुरुआत में आपको बहुत ही शर्म का सामना करना पड़े।  आसान शब्दों में कहें तो इलाज के दौरान जो शर्म आप महसूस करते हैं ,वह आपकी संवेदनशीलता को कम करता है।  जो कि आपके हकलाने का मुख्य कारण है। अपने आप पर हमेशा विश्वास रखें।  यहाँ पर मैं बहुत अच्छे तरीके से बोलने के बजाय ,बहुत ही आसानी से बोलने पर जोर डालूँगा।  हमें अपना लक्ष्य अपनी आवाज को अधिक से अधिक अपने नियंत्रण में रखने का प्रयास करना चाहिए।      क्लिक                       

अपनी सहायता आप स्वयं कैसे करे

  अपनी सहायता आप स्वयं कैसे?; 
1. स्वयं उपचार या सहायता हकलाने के संबन्ध में है। और यह हकलाने वालों के लिए है।                                          
2 . यदि आपके पास पर्याप्त चिकित्सीय सहायता उपलब्ध नहीं है और आप हकलाते है। तो आपको अपनी सहायता खुद ही करनी पड़ेगी और वह भी अपने विचारों और साधनों का उपयोग करते हुए।                                                              3 . पहली चीज आपको यह स्वीकार करनी होती हैं, कि आपका समर्पण पूर्णरूप से होना चाहिए किसी जादू की आशा में कभी न रहें।  इस संसार में ऐसी कोई जादुई दवा नहीं हैं ,जो कि हकलाहट को पूरी तरह से आपके जीवन से खत्म कर दें।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          4 . खाली मत बैठो, उठो और नये उपायों की तलाश करो या अपनाओ जो आपने आज तक नहीं किया है।
5 .  किसी भी उपचार के लिए यह आवश्यक हैं कि हकलाहट से पीड़ित व्यवित पूरी तरह से दृढ़ संकल्प लें और फिर प्रयत्न करें।                                                                                                                                                                                                                                                                                                               6 . यह किताब उन लोगो के लिए लिखी गयी है। जो हकलाते है और हकलाहट से बहुत परेशान है।
7 . आप को  हकलाहट की. अपेक्षा बोलने का एक आसान तरीका सीख सकते है जो आपको जरा सा भी तनाव नहीं देगा।                                                                                                                                                                                                                                                                8 .  यह किताब एक तर्क संगत व्यवहारिक कार्यकम के बारे में हमें बताती हैं, जो कि कई विश्वविहालयो एवं चिकित्सा केन्दों के शोध का परिणाम है।                                                                                                                                                                                                                                       9 . स्वयं चिकित्सा उन लोगों के लिए आवश्यक है।  सर्वप्रथम हमें यह मान लेना चाहिए कि ;-। हमारे बोलने की मशीन में कोई गड़बड़ी नहीं है।  क्योंकि जब हम किसी अनुकूल वातारण में बोलते हैं, तो हम नहीं हकलाते हैं
10 . और आपके इस सिथ्ति में सिथ्ति में नही हैं, कि आप को ई विशेषज्ञ से कोई सहायता पा सकें।                                    11 . कई संस्थाओं का यह मानना हैं, कि स्पीच चिकित्सा अधिक से अधिक उस व्यवित पर निर्भर करती हैं ,जो हकलाता है।                                                                                                                                                                                12 . उपचार की सहायता या असफलता प्रोत्साहन से कहीं ज्यादा आपके वादे या दृढ़ संकल्प पर निर्भर करती है।
13 . एक बात जानना जरूरी है,कि यह किताब किसी सफलता या पूर्ण रूप से इलाज का वादा नहीं करती है।  14 . लेकिन यह कहा जा सकता है, कि यदि हम इस किताब से दिये गए सुझाओं को माने तो हम अपने हकलाहटपन को कम कर उस पर काबू पा सकते है।                                                                                                                                                        15 . परन्तु सबसे महत्वपूर्ण यह है, कि हमें किसी भी सुझाव का इस्तेमाल जरूर कर लेना चाहिए।                                                             16 . यह बात मैं जरूर बताना चाहूँगा कि कई लोगों के बीच हकलाहट में कई अंतर है -यह निम्न लिखित बातों पर निर्भर करता है - परिसिथतियों के अनुसार यह बदलती रहती है।                                                                                                                                 17 . ज्यादातर हकलाने वाले सबसे अधिक कठिनाई तब महसूस करते हैं जब उन्हें शर्मिन्दगी या किसी समस्या के आ जाने के बारे में सोचते है। ----जब कोई हमसे सवाल पूछता है ---इन्टव्यू में ---अपना परिचय देने में ----फोन पर बात करते समय --- भीड़ में बात करते समय                                                                                                                                                                                                                                                          18 . हमें निम्नलिखित परिसिथतियों में कोई कठिनाई नहीं होती है ; --- खुद से बात करते समय --- किसी बच्चे से बात करते समय --- किसी पालतू जानवर से बात करते समय                                                                                                       19 . कोई दो हकलाने वाले व्यवित एक ही तरह से नहीं हकलाते हैं।  ---ज्यादातर हकलाने वाले लोग गाना गाते समय, चिल्लाते  समय या एक संगठन में पढ़ते समय नहीं हकलाते हैं।  यह इनकी विशेष योग्यता होती है।  हकलाहट का मूल कारण ; - हकलाहट के कई कारण हो सकते है।                                                                                                                                     1 . बोलने वाली कोशिकाओं का बोलते वक्त आपस में तालमेल न होना।                                                                                                                     2 . वंशानुगत कारणों से भी हो सकता है।  तो जो भी कारण रहे हों अब हम उन सबको भूल के आगे की ओर देखना चाहिए। और हकलाहट को अपने नियंत्रण में करने का अधिक से अधिक प्रयत्न में करने का अधिक से अधिक प्रयत्न करना चाहिए।