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मंगलवार, 3 नवंबर 2015

वार्षिक उत्सव


23 . आपको शायद पता होगा कि प्रत्येक वर्ष 22 अक्टूबर को international stammering awareness day (sad )मनाया जाता हैं। सरल शब्द में हकलाहट दिवस प्रत्येक वर्ष 22 अक्टूबर को मनाया जाता हैं। इस सेन्टर से ठीक होने के बाद स्थाई स्पीच होन पर कुछ चुनिन्दा व्यवित्यो को वर्ष में एक बार आमंत्रित किया जाता है तथा उनको सम्मानिक किया जाता हैं तथा उनका  इंटरव्यू लिया जाता हैं। भारत के  प्रमुख समाचार पत्रो में प्रकाशित करवाया जाता है तथा टी.वी. चैनलों में भी प्रसारित किया जाता है तथा स्थाई मेम्बरशिक प्रदान की जाती है।  click here

शनिवार, 31 अक्टूबर 2015

L हकलाना उम्र बढ़ने के साथ- साथ बढ़ता हैं ऐसा क्यों ?

L हकलाना उम्र बढ़ने के साथ- साथ बढ़ता हैं ऐसा क्यों ?
;जैसा आप कि आप जानते हैं कि जहां भी आप ठीक बोलना चाहते है वही आप अधिक हकलाते है तो उम्र बढने के मुताबिक हर व्यवित ठीक ही बोलना चाहता हैं। ठीक व शुध्द बोलने की सोचते ही दिमाग का ध्यान समस्या पर जाने से घबराहट के कारण व्यवित अधिक हकलता है। यदि ध्यान समस्या पर न जाये तो हकलाना स्वयं बंद हो जायेगा। इसीलिये उम्र बढ़ने के साथ -साथ हकलाना भी बढ़ता जाता हैं लेकिन जो व्यवित इस समस्या को अधिक महसूस नहीं करते ,उनका हकलाना धीरे धीरे कम भी हो जाता है इसीलिये कुछ ई. एन.टी.विशेषज्ञ यह सलाह देते है कि उम्र बढ़ने के साथ मरीज ठीक बोलने लगेगा लेकिन हकलाने को 100 %दिमाग से निकलने के लिये सेन्टर में आना ही चाहिये।  click here

हकलाने वाले व्यवित अपनी हर असफलता का कारण हकलाहट को ही मानते है क्यों

 हाँ मै कई बार हकलाने वालों से सना हूँ कि सर यदि मैं नहीं हकलाता तो मै इंजीनियर बनता ,टीचर बनता ,नेता बनता या अन्य क्षेत्र में बहुत आगे होता। यह हकलाहट हमारे लिये बाधक हैं। मैं बहुत सारे असफल लोगों से मिला हूँ जैसे आप अपनी असफलता का कारण हकलाहट को मानते हैं ,ठीक उसीप्रकार बहुत से असफल सामान्य व्यवित अपनी असफलता का कारण गरीबी ,सही गाइड लाइन न मिलना ,पिता शराबी होना ,माँ की बचपन में मृत्यु हो जाना ,बचपन में पिता की मृत्यु हो जाना ,सही स्कूल में न पढ़ना ,सही टीचर का न पढ़ना स्कूल गांव से दूर होना ,लड़की होना ,सही लड़की से विवाह न होना आदि मानते हैं लेकिन ऐसा नहीं हैं जो लोग मेहनत करते है ,वह इन समस्याओं के होते हुये भी बहुत आगे बढ़ते हैं। इन समस्याओं को झेलते हुये जो व्यवित आगे बढ़ सकता है वही सफल व्यवित होता है तो आप भी हकलाहट होते हुये भी बहुत आगे बढ़ सकते सकते है। बस आवश्यकता हैं उठ कर खडे होने की ,हकलाहट के प्रति नजरिया बदलने की। हकलाहट से दोस्ती करने की। किसी व्यवित के पिता की मृत्यु हो गई तो उसके पास दो रास्ते हैं। पहला वह जीवन रोता रहे कि मेरे पिता होते तो मै ऐसा कर लेता ,वैसा कर लेता और दूसरा रास्ता यह हैं कि पिता तो चले गये उन्हें भूलो और योजनाबध्द तरीके से जीवन में काम करो। आप पायेंगे कि आप बहुत आगे पहुँच जायेंगे। पिता अब भगवान के पास से देखकर खुश होंगे ,आप पर नाज करेंगे कि मेरे न रहते हुये भी मेरा बेटा बहुत आगे जा रहा हैं और यदि पिता की याद कर -कर के आप आगे नही बढ़ेगे तो पिता की आत्मा को भी तकलीफ होगी की मै अपने बेटे के लिये सब कुछ छेड़ कर आया लेकिन यह वेवकूफ कुछ नही किया समस्या का खोजों ,समस्या निमिर्त मत करो।उसीप्रकार आप भी सीख सकते हैं। चूंकि यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमे मेडिसीन कम लगती है ,इसमे आत्मविश्वास ,मेहनत लगन Acceptance एवं साइकोलॉजिकली मेथड की आवश्यकता होती हैं। हकलाने वाला व्यवित लम्बे समय से पीड़ित होता हैं। हरतरफ से हताश हो जाता है। इसीलिये उसको यह विश्वास नही होता है कि मैं ठीक हो जाउंगा।   click here

सर हमें और हमारे घरवालों को यह विश्वास ही नही होती कि मैं ठीक हो जाऊगा ,ऐसा क्यों

i सर हमें और हमारे घरवालों को यह विश्वास ही नही होती कि मैं ठीक हो जाऊगा ,ऐसा क्यों ?;प्रिय मित्रों ,आपको तो मेरी संस्था एवं मुझपर विश्वास नही हैं लेकिन जब मै परेशान और हकलाता था तो मुझे दूसरी संस्था ,डाकटर में विश्वास तो बिल्कुल नहीं था। यहाँ तक कि अपने आप पर भी विश्वास नही था। डाक्टर ,वकील ,पुलिस इन तीन पर विश्वास करना ही होता है। मेरी आपको सलाह यह है कि आप किसी पर विश्वास मत कीजिये ,यहाँ तक कि अपने आप पर भी विश्वास मत कीजिये ,विश्वास कीजिये अपने कार्य ,मेहनत ,लगन पर। जैसे लोग गाना गाना सीख जाते है , डान्स करना सीख जाते हैं , 

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2015

हकलाने वाले व्यवित बहुत पीछे क्यों रह जाते हैं

D हकलाने वाले व्यवित बहुत पीछे क्यों रह जाते हैं ?; हकलाहट के कारण हम पीछे नहीं रह जाते है ब्लीक हकलाहट का डर हमें पीछे ले जाता है। यह आपकी साइकोलॉजिकल सोच है। ऐसा नहीं हैं ,आपको पता है कि रितिक रोशन जो फ़िल्म एक्टर हैं ,उनके मुँह से एक शब्द नहीं निकलते थे ,वे हकलाते थे और आज फिल्मों में अकबर के उर्दू डायलाग बोलते है। रितिक रोशन जी ने स्वयं स्टार टी.वी. में बतलाया हैं। उनका इंटरव्यू हमारी बेवसाइट पर आज भी उपलब्ध है ,आप देख सकते है। हकलाने वाले कई लोग डॉकटर ,इंजीनियर ,वकील ,टीचर ,पत्रकार ,नेता बन चुके हैं। हाँ ये बात सत्य हैं कि थोड़ी मेहनत और हकलाहट के पति अपना नजरिया बदलना पड़ेगा। तो आप यह नही कह सकते कि हकलाने वाले लोग यह नहीं कर सकते ,वह नही कर सकते। क्या सभी सामान्य लोग उचाइयां छूते हैं ?नही ना। कुछ सामान्य लोग जो मेहनत करते हैं ,वही सफल होते हैं ,वही हाल यहाँ भी हैं। जो मेहनत करते है वही लोग यहाँ भी सफल होते है। सफलता का शार्टकट नही होता है।

सोमवार, 19 अक्टूबर 2015

स्पीच थेरेपी ,साइको थेरेपी , सपोर्ट ग्रुप SHP & नेशनल कॉन्फरेंस

 क्रमांक 
 स्पीच थेरेपी 
 साइको थेरेपी 
 सपोर्ट ग्रुप  SHP 
 नेशनल कॉन्फरेंस 
 01  उपयोग  की जाने वाली विधि 
 इसमे स्पीच ओर्गन्स की एक्शन प्रोसेस  को कंट्रोल करने में जोर दिया जाता है  
 इस में डर , शर्म , शंकोच , हीनभावना  को कंट्रोल करने  में जोर दिया जाता है 
 इन दोनों टेक्निक  या किसी एक टेक्निक  को कही से सीखता है और फिर अन्य PWS  को अपने अनुभव शेयर करता है इनके अनुभव  आप के काम आ सकते है और नहीं भी आ सकते है  
 बहुत सारे pws  एक ही जगह में मिलते है और अपना अनुभव शेयर करते है  कुछ फेमस टेक्निक का प्रदर्शन भी करते है  
   इस के अनुसार
   इस के अनुसार हमारे स्पीच ओर्गन्स की वर्किंग  प्रोसेस  गलत होती है इस लिए हमारी आवाज में डिसऑर्डर  पैदा होता है 
और इस डिसऑर्डर के कारण  मन में डर , शर्म , शंकोच , हीनभावना  पैदा होती है  यहाँ पर स्पीच)थेरेपिस्ट होते है जो क्वालिफाइड होते है इनके पास 
 इस के अनुसार  सबसे पहले हमारे मन में डर  आता है , फिर इस डर  के कारण  हमारे स्पीच ओर्गन्स की वर्किंग  प्रोसेस गलत हो जाती है  और लगातार यह प्रोसेस रिपीट होने से मन में डर , शर्म , शंकोच , हीनभावना  पैदा होती है
 इन के अनुसार  एक pws  दूसरे  new pws  की  हेल्प कर सकता है और काफी हद तक वह स्टंमेरिंग  को overcome  कर सकता  है  यहाँ कोई स्पेशलिस्ट नहीं होता 
 यहाँ एक इमोशनल सपोर्ट मिलता है  जब आप अपने जैसे बहुत सारे  लोगो  लोगो  से मिलते है तो आप को एक विश्वास मिलता है की  जब इतने सारे लोग हकलाते है और निजी जिंदगी में सफल है तो मै  भी सफल हो सकता हु 
 क्वालिफिकेशन 
 [BSc (स्पीच एंड हियरिंग ) BSLP  MSLP  DSPL  DSH
बहुत सारे MS (ENT ) भी स्पीच थेरेपी देते है परन्तु यह लोग बीमारी के स्पेशलिस्ट है न की स्पीच डिसऑर्डर के , इस लिए इनका  थेरेपी देना का तरीका    
MA (Psychology )  PhD (Psychology)   MD ( Psychritiesc, Neurologist  Neurologist  surgen  
लगभग लगभग क्वालिफाइड  पर वयक्ति कोई नहीं होता , इनमे से कुछ लोग क्वालिफाइड व्यक्ति द्वारा थेरेपी  लिया हुआ होता है  
कुछ क्वालिफाइड  लोगो को बुलाया जा सकता है पक्का नहीं यही 
समय  
ये लोग 1 -2  घंटे डेली और 5 -6  महीने का टाइम मांगते है अधिकतर स्पीच थेरेपी सेंटर आवासीय नहीं होते है भारत में कुछ गिने चुने शहरों में है , आवासीय स्पीच सेंटर वाले लगभग एक महीने का टाइम  लेते है 
ये लोग 1 -2  घंटे डेली और 5 -6  महीने का टाइम मांगते है अधिकतर साइको थेरेपी सेंटर आवासीय नहीं होते है भारत में कुछ गिने चुने शहरों में है में ही आवासीय है आवासीय साइको थैरेपी  वाले लगभग एक महीने का टाइम  लेते है 
ये वीकली या मंथली मिलते है  और एक दूसरे को सीखते है टाइम का कोई लिमिटेशन   
यह वर्ष में 1-2  बार होता है 
कंट्रोल होने का टाइम 
5 दिन से 6  महीने का टाइम स्पीच थेरेपिस्ट ले सकते है 
5 दिन से 6  महीने का टाइम साइको  थेरेपिस्ट ले सकते है 
लाइफ टाइम तक मीटिंग अटैंड करना होता है  आप की मर्जी के अनुसार  जब मन हो जाओ न मन हो न जाओ 
लाइफ टाइम तक मीटिंग अटैंड करना होता है  आप की मर्जी के अनुसार  जब मन हो जाओ न मन हो न जाओ 
अच्छी सफलता   के लिए  क्या करे ?
जिस जगह सिक्स  मेथड एक साथ अप्लाई होती हो वह  थेरेपी लेनी चाहिए
स्पीच जिस जगह सिक्स  मेथड एक साथ अप्लाई होती हो वह  थेरेपी लेनी 
थेरेपी  लेने  के बाद  मोटिवेशन एंड refresh  के लिए बीच बीच में जाते रहना चाहिए 
बहुत अच्छा मोटिवेशन के  लिए  NC  अटैंड  करना चाहिए 







शनिवार, 17 अक्टूबर 2015

थेरेपी और सावधानी रखनी चाहिए

                           थेरेपी लेने के बाद हमें क्या क्या सावधानी रखनी चाहिए
                                                     थेरेपी लेने के पहले
- यदि आप किसी थेरेपी सेंटरस / स्टंमेरिंग सेन्टर / सुपोर्ट ग्रुप /नेशनल कॉन्फरेंस में  थेरेपी लेने जाने की प्लानिंग कर रहे है  तो निम्न लिखित बातो का ध्यान रखना चाहिए
1 -समय----- टाइम ले कर जाना चाहिए क्यों की हकलाहट का ट्रीटमेंट चमत्कारी  मेथड से नहीं हो सकता  यदि आप टाइम ले कर नहीं जाते तो आप का मन घर में /ऑफिस में / स्कूल /कालेज में लगा रहेगा और आप सही तरीके से थेरेपी नहीं ले पाओगे  और आप को  किसी भी तकनीक पर विश्वास नहीं होगा अतः टाइम का प्रेशर  पैदा ना  होने दीजिये । आप के लिए आर्गेनाइजर  जो टाइम रिकमेंड किया है उतना टाइम दीजिये और लास्ट में एक बार कहिये की यदि और टाइम जी जरुरत हो तो मै  दे सकता हूँ। चुकी स्टंमेरिंग  एक आर्ट है यहाँ टाइम लगता है क्लिक हियर 

2 -मन  की एकाग्रता  -   रियल  बात यह है की कोई हकलाने वाला व्यक्ति इतना सहमा /डरा / संकोची  होता है की उसका विश्वाश किसी डॉक्टर / स्पीच थेरेपिस्ट / पर बिलकुल विश्वाश तो होता ही नहीं है यहाँ तक की उसे अपने आप पर भी विश्वाश नहीं होता है जब वह कोई टेक्निक सीख रहा होता है तब तब भी शंका में घिरा रहता है की मै  यह टेक्निक मेरे लिए ठीक है , यह मेरे काम की है की नहीं , वह सस्पेंस में रहता है  ।  तो मई आप को बिलकुल साफ साफ बोलुँगा की आप कही भी टेक्निक सीखिये मन से सीखिये , जो कोई टेक्निक सिखाई जाये तो पूरा मन को एकाग्र कीजिये ( मोबाइल /कॉल/ sms / फेसबुक / किसी फ्रेंड की याद /घर की याद / परीक्षा की चिंता को हाबी  ना  होने  देवें / मै कई  बार फील किया हूँ  की मेरे  बहुत से ऐसे PWs  है जो इन्ही  में खोये रहते है , और सारी  एनर्जी   इन फालतू की बातो में खर्च कर देते है  और टेक्निक सिखने को सब से लास्ट की लिस्ट में
रखते है ऐसी फर्स्ट लिस्ट में रखना होगा मन को एकाग्र करके सीखना होगा और रियल लाइफ में उपयोग करना होगा click 
3 - पैसा - दोश्तो यह सबसे बड़ा पैरामीटर है । हम सब बेटर सुविधा काम पैसे में खोजते है ( सही भी है ) पर रियल में यह पॉसिबल नहीं है  यदि कोई बहुत काम पैसे लेकर आप को थेरेपी दे रहा है तो कई सवाल खड़े होते है  सच्चाई  तो यह है की अच्छी सुविधा के लिए अच्छा पैसा खर्च करना पड़ता है फिर भी हमें गूगल भगवान से एक बार पूछ लेना चाहिए यह  गूगल से देख लेना चाहिए की किस किस सेंटर की कितनी फीस है क्या क्या सुविधाये है ,कौन कौन  सी तकनीक सिखाई  जाएगी , अनुभव कितना है , क्वालिफिकेशन कितना है , सेल्फ़  का हॉस्टल है की नहीं ,थेरेपी कितने घण्टे डेली होती है, सारी सुविधा से संतुष्ट  होने पर ही अपना अगला कदम बढ़ाना चाहिए  यदि किसी सेंटर की फीस अधिक है और  अच्छी सुविधा दे रहा है तो थेरेपी लेना चाहिए   क्लिक हियर 

4 - पता कीजिये की  स्पीच थेरेपी है /साइको थेरेपी/ या दोनों है ----- बहुत सारे स्पीच थेरेपिस्ट  केवल स्पीच थेरेपी 1 -2  घंटे डेली याद साप्ताहिक देते है  और कुछ नहीं सीखते है केवल धीरे  धीरे बोलना सीखा देते है  और बोलते है की ऐसे ही रियल लाइफ में बोलो जो पॉसिबल नहीं होता है , साथ में साइको थेरेपी भी जरुरी है जिस से आप का डर  निकलता है मेरे हिसाब से सिक्स प्रोसेस होती है  स्तम्मेरिंग को ओवरकम  करने के लिए  और   
 यही 6  आप की हेल्प करेगी 1 स्पीच थेरेपी 2 -साइको थेरेपी 3 - मेडिटेशन  4 मेडिकेशन  5  - adjuster ( optional )6 -सपोर्ट ग्रूप 
 जिस सेंटर में यह ६ प्रोसेस फॉलो की जाती हो वह एक अच्छा सेंटर माना जा सकता है  click 

5 - ऐसे बहुत सारे PWS  है जो अपने फैमिली को बिना बताये  ज्वाइन करते है  और सोचते है की अभी नहीं बताउगा ठीक होने पर बता दुगा ।  ऐसा करने से आप को काम फायद होगा क्यों की आप को आर्थिक ,सामाजिक पारिवारिक  मौहौल नहीं मिलेगा और यहाँ से जाने के बाद आप घर में रूल्स फॉलो नहीं कर पाओगे  और आप  समय / पैसा / मेहनत  सब बेकार  हो जायेगा । आप को अपनी फैमली मेंबर की हेल्प लेनी चाहिए
6 वर्षाती  मेढ़को से बच कर रखिये - बहुत सारे ऐसे भी लोग होते है जो थोड़ी दिन की थेरेपी या एक दो सपोर्ट ग्रुप या NC  अटेंड कर लिए और अपने आप को स्तम्मेरिंग एक्सपर्ट मानाने लगते है ।  कुछ लोग बहुत अच्छे भी है जो रियल में आप की हेल्प करेंगे , ऐसी बहुत  आर्टिकल्स /वेबसाइट/ब्लॉग /फेसबुक  में पेज है जो आधे अधूरे है लिखा कुछ है रियलिटी कुछ और ही है  ऐसे ही मुझे एक वेबसाइट मिली जिस को कॉल किया वह बोलता है मै  आप को ठीक कर दुगा मै  कंप्यूटर एक्सपर्ट हूँ बिजी हूँ २ वर्ष पहले साइट बना दिया था आप टाइम नहीं दे पता पर आप को ठीक कर दुगा आप मुझे कल सुवह सात बजे कॉल कीजिये । ऐसे बहुत सारे पेज है जो बना तो दिए गए है पर वर्क जीरो है  यहाँ पर आप अपना टाइम ख़राब करेंगे इस से बच कर रहना है "नीम हाकिम खतरे की घंटी " cilck 
7 - यह सोच कर किसी  भी स्पीच  थेरेपी सेंटर में मत जाइये  की मै जब लौटुँगा हो 100 % ठीक हो कर लौटुँगा , जैसे किसी व्यक्ति के ऑपरेशन के जस्ट  बाद 100 % गुड फील नहीं करता, कुछ दर्द , कुछ तकलीफ  रहती है ( किसी किसी की प्रॉब्लम ऑपरेशन के बाद बढ़ भी जाती है कुछ समय के लिए )   घर जा कर कुछ दिन तक मालिश पट्टी दवाई खाने से धीरे धीरे आराम मिलना चालू हो जाता है । ठीक वैसे ही हकलाहट में होता है थेरेपी लेने के बाद कुछ दिन आप को घर में भी मेहनत करनी ही पड़ेगी  आप चाहे (थेरेपी/ सपोर्ट ग्रुप /नेशनल कॉन्फरेंस में  ) कही भी ले  पर  घर में केयर  करना ही पड़ेगा,  रियल लाइफ में तकनीक का उपयोग करना ही होगा click 
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                                                     थेरेपी लेने के बाद  
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दोश्तो आप को यह जानना जरुरी है की थेरेपी लेने के बाद  आप को क्या क्या सावधानिया रखनी चाहिए  तो आज मै  आप को यहाँ यह बताउगा की आप जब थेरेपी ले कर लौटे हो क्या क्या सावधानी रखना चाहिए 
1 - अपने आप को अड़ियल  न दिखाए - थेरेपी लेने के बाद आप आदमी यह सोचता है की आप मै स्पीच रूल्स  फॉलो क्या करू , और हकलाने वाले अक्सर यह सोचते /खोजते  नजर आते है  की ऐसा कौन सा दिन होगा जब काम स्पीच रुल फॉलो न करेंगे और बहुत  अच्छा बोलेगे ।  मेरे अनुभव  कहते है की ड्राविंग सीखते के बाद ऐसा शायद  ही  कभी वो दिन आये जब आप बिना  ब्रेक, क्लिच,  एक्सीलेटर ,  पेट्रोल  का  बिना उपयगो किये  गाड़ी ड्राइव कर  पाओगे , मेरे हिसाब से यह सोचना गलत है । सोचना यह चाहिए  की जम  कर रूल्स फॉलो  करुगा और गाड़ी सावधानी  पूर्वक ड्राइव करुगा  तभी हमारी यात्रा सफल होगी । ठीक इसी  प्रकार एक हकलाने वाले व्यक्ति को सोचना चाहिए की थेरेपी का मतलब  बोलने  के रुल्स  सीखना होता है  और रूल्स सिखने के बाद इन रुल्स  को फॉलो करना और रियल लाइफ में फॉलो  करना हमारा प्रथम लक्ष्य होना चाहिए । 
2 - अपनी हकलाहट  को छुपाने से बचे - 
3 - रियल लाइफ में टेक्निक का उपयोग कीजिये 
4 -रेगुलरिटी  का ध्यान दीजिये 
5 - हकलाहट को मैनेज करना सीखिये 
6 - सुनाने की भी आदत डालिये 
7 - click