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शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

ग्राउड रुल

जब हम किसी  कार्य में बार बार फेल होते हैं ,तब हमारे मन मे डर पैदा होने लगता है। आइये मैं कुछ ग्राउड रुल आप को बताता हूँ। यदि आप इसको फालो करते है तो निश्चत ही आप ब्लाकेज को खत्म करना छोड़ देंगे और ब्लाकेज को पार करने का प्रयास करना सीखेंगे। जब हम बोलना चाहते है ,तब हमारे मन में कुछ इस प्रकार के विचार आते है। मुझे जल्दी बोलना चाहिए क्योंकि यदि आराम से बोलुँगा तो सुनने वाला बोर हो जायेगा और उसके पास इतना समय नही है। कि वह मेरी बात को सुने। इसलिए हमे तुरन्त ही जल्दी से जबाब देना चाहिए। दोस्तो आपने कभी सोचा है ,कि मै ऐसा क्यों सोचता हूँ ?विचार कीजिए। चोर सोचता है दुनिया में सब चोर है। मेरा मतलब साब है। जब कोई आपसे बात करता है तब आप उसकी बात को विल्कुल नहीं सुनते है और आप का ध्यान जबाब का प्रीब्यू देख कर कठिन अक्षर ढूढने में रहता है। अर्थात आप को लगता है। कि जल्दी से यह व्यवित  बोले। आप विल्कुल ध्यान से नहीं सुनते हैं इसलिए आपको 100 /यह विश्वास हो गया है ,कि कोई व्यवित मेरी बात नहीं सुनता हमें जल्दी जल्दी अपनी बात बोलना चाहिए और आप 25. 50 शब्द प्रति मिनिट बोलने का प्रयास करते है। और हमेशा समय के दबाब में रहते है। मैं बताना चाहूँगा जो व्यवित जितनी बड़ी पोस्ट में होता है ,वह उतना अच्छासुनने वाला होता है। और धीरे बोलने वाला होता है। उदाहरण अटलबिहारी बाजपेयी जी। आप लोग कहते हैं ,कि नहि मेरी कण्डीशन कुछ और है। मेरा जॉब कुछ और है धीरे बोलने से मेरा काम नहीं होगा महोदय मैं बताना चाहूँगा अच्छा वक्ता वही होता है ,जो अपनी बात को बिना डर के विना उलट पलट के ऑखे मिला कर सकें। जब आप बोलें तब समय का दवाव मन में विल्कुल नहीं आने दें। आप सोचें जब इसकी बात मैंने ध्यान से सुना है ,तब यह भी मेरी बात ध्यान से अवश्य सुनेगा। मैने आज तक 500 से अधिक इन्टरब्यू दिया होगा। किसी भी इन्टरब्यू में यह नहीं कहा गया हैं ,कि जल्दी बोलो मेरे पास समय नही है।आपस ? और जब मैं स्वीकार्य कर लिया कि हाँ मैं हकलाता हूँ। तब तो और सरल हो गया सामने वाला समझ गया यह हकला है। और यह मानसिक रूप से तैयार हो गया मेरी आवाज सुनने के लिए। जब दोनों लोग तैयार हो गये तब निशिचत रुए से वातचीत सफल होगी। वास्तव में होता यह है , कि हम टाइम दबाब में आ जाते हैं। तब हमारी स्पीड बढ़ जाती है। स्पीड आर्गन विगड़ जाते हैं आँखे यहाँ वहाँ होने लगती है। और हम सही वर्तालाप नहीं कर पाते हैं। क्योंकि हम अपनी लड़ाई में उलझे हैं और सुनने वाला भी यही सोच रहा था ,कि यह आम व्यवित जैसे बोलेगा और आम व्यवित जैसे आप बोल नहीं रहे हैं। तो उसे भी आपकी आवाज सुनने के लिए मानसिक रूप से तैयार होने पड़ेगा। यह तैयार है। हीं ,और आप बोलना प्रारंभ कर दिये तब उसे लगता हैं ,यह कैसे बोल रहा है। और वह पूरा प्रयास भी करता है ,लेकिन आप समय ही नहीं देते उसे। तब वह टेंशन हँसी के रूप में बाहर आता है। और आप समझते हैं ,कि यह मेरी हँसी   ........... तब उसे लगता है ,यह कैसे बोल रहा है। और यह पूरा प्रयास भी करता है ,लेकिन आप समय ही नही देते उसे। तब वह टेंशन हँसी के रूप में बाहर आता है। और आप समझते है ,कि यह मेरी हँसी।

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