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रविवार, 27 सितंबर 2015

प्रथम नियम Graund rules

 प्रथम नियम
 हमेशा धीरे धीरे सोच समझकर बात करने की आदत डालें चाहे आप हकलाते हो या नही ;  - धीरे चलना,तेज चलने की अपेक्षा बहुत अच्छा हैं ,जैसा कि हम जानते हैं ,कि तेज खरगोश की अपेक्षा धीरे कछुए को नियनित्रत करना ज्यदा आसान है धीरे धीरे और पर्याप्त समय ले कर बात करने से आप समय के दबाव को भी अनुभव नहीं करेंगे जैसा कि हम हकलाने वाले कि यह बिना हकलाये बोल सकें। इससे बस तनाव बढ़ता है। समय के दबाव को कम करने के लिए इस बात की भी सलाह दी जाती हैं ,कि बैट करते समय हमें वाक्यों के बीच थोड़ी देर के लिए रुकना चाहिए। यह नियम इतना आसान नहीं हैं ,जैसा की हम सोचते हैं इसे अपने जीवन में अपनाने के लिए हमें बहुत एकाग्रता की आवश्यकता है।
 जीवन में प्रयोग कैसे करें ; -                        
1 . जब आप धारा प्रवाह में बोलते हैं ,तो उस पर भी ध्यान दें। इस चिकित्सीय प्रकिया पर काम करते समय अधिक से अधिक बोलने का प्रयास करें जीतना आप कर सकते हैं। दोस्तो आप यदि यह लगातार करते हैं ,तो आप पाएंगे कि आपमें कन्ट्रोलिग आ रही है और विश्वास बढ़ रहा है। डर कम हो रहा है। जिन लोगों से आप भागते थे अब उनमें दोस्ती होगी। अपको लगेगा कि दुनिया बहुत अच्छी है लोग मेरी बात सुनते है। जब आप छोटे में 10 मिनट तक प्रैविटस करें जब आप अकेले हों। इससे जो बात आप दूसरो के साथ करना चाह्ते हैं यह धीरे - धीरे बोले हैं। दूसरा जब भी आप किसी के साथ हों तो समय के दबाब वाली भावनाओं का हमेशा प्रतिकार करो !उन क्षणों में जब आपसे बोलने की आशा की जाती है तो कुछ बार आप बहुत ही जल्दी का अनुभव करते लगते हैं। आपको यह लगता है कि समय आपके पास कम है और एक भी क्षण आपको बरबाद नहीं करना है। अपनी ओर से भरसक प्रयास करो की समय के दबाव से बचो। हकलाने वाले इस बात के भी आदि होते है कि ए वे शान्त नहीं रहना चाहते जब वे शर्म का अनुभव करते हैं। आपको बात करते समय हमेशा बीच - बीच में रुकने की आदत डालनी चाहिए। अपना समय लो। यह ध्यान रखो कि लोग तुम्हारी तब तक प्रतीक्षा करेंगे जब तक तुम अपनी बात समाप्त नही कर लेते। रुको और अपना समय लो।                                                                                                

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