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रविवार, 13 सितंबर 2015

विभिन्न लोगों द्धारा उपचार के तरीके

                                                  3 विभिन्न लोगों द्धारा  उपचार के तरीके
भारत में इस रोग के उपचार की सिथति कोई बहुत आशाजनक नही है। कुछ सज्जन हकलाने का इलाज एलोपैथिक दवाई में खोजते है। शिक्षित वर्ग इसके लिये नाक, कान, गला (ई ,एन ,टी ) रोग बिशेषज्ञ के चक्कर काटते। throat, larynx, voice box, Tongue संबंधी अनेक चेकअप करवाते लेकिन कोई डिफेक्ट नही निकलता। यहाँ तक कि कुछ लोग सोनोग्राफी तथा एक्सरे थी करवाते है। कंम लिखे -पढ़े लोग देवी,टोना-ज़ादू ,झाड़-फूक ,शंख बजाना तोते के जूठे फल खिलाना ,मिर्ची अधिक खाना ,आयुर्वेद voice सिरप ,अकलकरा चीर्ण जैसे दवाइयो का प्रयोग करना आदि अनेक़ो प्रकार के उपाय करते हैं। कुछ लोग जीभ को मोटी -पतली ,छोटी -बड़ी मानते है। इसे ठीक करने के लिये बादाम-किसमिस का सेवन करते हैकुच्छ लोग ताकत की दवाइयों मेँ उपचार ढूडते है। असलियत यह है कि कोई भी विशेषज्ञ बिना अपने व्यक्तिगत अनुभव के इस रोग के इलाज में सफलता प्रप्त नही कर सकते है और यही कारण है कि भारत में इसका इलाज हर जगह उपलब्ध नही है। हकलाहट को वैज्ञानिक रोग कम आदत अधिक मानते है जबकि कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्या मानते है जिसका इलाज भारत में बड़े से अस्पतालो में नही है। योग्यता होते हुये भी हकलाने वाले व्यक्ति का जीवन आगे बढ़ने में असमर्थहै अर्थत। न मरते है और ना ही मोटे होते है। ये व्यवित टिकिट खिड़की ,टेलीफोन ,पटिरयो ,मीटिंग इंटरव्यू आदि से बचने की कोशिश करते है। एक अजीब सा डर,घबराहट मन में उत्पन्न होती है। एक योग्य व्यक्ति होते हुये लिखित परीक्षा में अच्छे नम्बर लाने के बावजूद इंटव्यू में बार -बार असफल हो जाते है। शादी-विवाह के मामले में बी भी अनेकों अड़चने आती है। एष्टृः हकलाने वाले व्यक्ति मानसिक,शारीरिक,सामाजिक,पारिवारिक यातनाएँ झेलते रहते है इन व्यक्तियो को गुस्सा तनाव अधिक जल्दी आता है तथा झगड़ालू प्रबृति के होते है। आयु बढ़ने पर उनकी याददास्त भी कमजोर होती है ,कुछ लोग तो आत्महत्या तक करते की सोच लेते है। हकलाने वाले व्यक्ति अपनी अलग दुनिया बना लेते है और इसी में खोये रहते है और किसी से बात नही करना चाहते है इसे आटिज्म कहते है। हकलाने वाले बहुत से व्यक्ति बहुत ही इंटेलिजेंट एवं साहसी (कमजोर आई ,व्यू ,वालो को छोड़कर )होते है। इन्हे स्वयं आभाष होता है कि यदि मै नही हकलाता तो आज मै बहुत आगे होता। click  here 
                                                            

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