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सोमवार, 7 सितंबर 2015

हकलाहट पर लोगो की प्रतिक्रिया नकारात्मक क्यों होती है ?

                    हकलाहट पर लोगो की प्रतिक्रिया  नकारात्मक  क्यों होती है ?
वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चता है कि किसी का हकलाना सुनकर प्रातः सभी व्यवित एक तरह का तनाव महसूस करते है। यानि बगैर उनके जाने उनकी ह्दय गति व उनका रवत चाप बढ़ जाता है। यह तनाव उनमें  एक तरह की घबराहट या विकरालता पैदा करता है। कभी-कभी यह तनाव अनचाही हसीं के रूप में प्रकट होता है। इसीतरह हकलाने वाले जब अपने आप को ठीक से बगैर हकलाये बोलने के लिये मजबूर हो पाते है तो उनमें भी एक तरह का तनाव उतपन्न होता है। अब प्रश्न यह है कि किसको अपने तनाव से बचने की आजादी दी जाये,त्रोता को या वक्ता को?आदर्श तो यह होगा कि दोनों ही पक्ष अपने तनाव से ऊपर उठे और इस वार्तालाप के साक्षा लक्ष्य को प्राप्त करने  का प्रयास करे । यानि क्षौता अपने कम्फर्ट जोन को और बढ़ाये, मानवीय संरचना और क्रियाविधि से। दूसरी तरफ हकलाने वाले भी प्रभाव के बजाय संचार यानि अपनी बात समझने पर ज्यादा ध्यान दे। दोनों ही पक्ष को उन अनचाही पतिक्रियाओ पर ध्यान देना होगा जो उनसे अनजाने में हो जाती है। जैसे निगाहे फेरना,ध्यान से सुनने की बजाय बेचैन हो जाना,नकारात्मक या आलोचनात्मक भाव भंगिमा (बॉडी लैंग्वेज )आदि  click here

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